Hemant rasane

    पुणे. पीएमसी द्वारा कोरोना संकट का मुकाबला किया जा रहा है। अपने कर्मियों के सुरक्षा के लिए पुणे महानगरपालिका (PMC) ने उन्हें सुरक्षा कवर दिया गया है, लेकिन इसमें ठेके (Contract) के कर्मियों का समावेश नहीं है। जबकि ठेके के कर्मी जान की बाजी लगाकर काम करते है। उपचार के अलावा इन्हें कोई सुविधा पीएमसी नहीं देती। इस बीच मांग की जा रही थी कि विद्युत दाहिनी और अस्पताल में काम करनेवाले ठेका कर्मियों की अगर कोरोना (Corona) से मृत्यु (Death) होती है तो उनके वारिसों को 10 लाख की सहायता (Help) की जाए। इससे सम्बंधित प्रस्ताव नगरसेवकों द्वारा स्थायी समिति के समक्ष रखा गया था। इसे समिति ने मंजूरी दी। ऐसी जानकारी स्थायी समिति के अध्यक्ष हेमंत रासने ने दी। 

    पीएमसी ने अपने कर्मियों के लिए कोरोना सुरक्षा कवर योजना लागू की है। मनपा में पहले से ही मजदुर कल्याण निधि कार्यान्वित किया गया है। इसी निधि के तहत यह सहायता की जाएगी। पीएमसी प्रशासन के निर्देशानुसार, इस योजना के लाभार्थी मनपा के कर्मी व अधिकारी जिन्हे कोरोना का काम दिया गया है, ऐसे सभी लोग होंगे क्योंकि स्वास्थ्य विभाग के अलावा सभी विभागों के कर्मी और अधिकारियों को मनपा प्रशासन ने इस काम पर लगा दिया है। इसके तहत कर्मियों की मृत्यु हुई तो उसे 1 करोड़ की वित्तीय सहायता की जाएगी। अगर वारिस को नौकरी चाहिए तो नौकरी व 75 लाख की सहायता की जाएगी। इस योजना से संबंधित सभी अधिकार मजदूर कल्याण निधि समिति के पास रहेंगे। इसके अलावा अब कई योजनाएं लागू की हैं। अब तक मनपा प्रशासन द्वारा 15 परिवारों को 25 लाख की राशि दी गई है, लेकिन इसमें ठेके के कर्मियों का समावेश नहीं है। जबकि ठेके के कर्मी जान की बाजी लगाकर काम करते है। उपचार के अलावा इन्हें कोई सुविधा पीएमसी नहीं देती। 

    नगरसेवकों ने स्थायी समिति के समक्ष रखा था प्रस्ताव

    इस बीच, मांग की जा रही थी कि विद्युत दाहिनी और अस्पताल में काम करनेवाले ठेका कर्मियों की अगर कोरोना से मृत्यु होती है तो उनके वारिसों को 10 लाख की सहायता की जाए। इससे सम्बंधित प्रस्ताव नगरसेवकों द्वारा स्थायी समिति के समक्ष रखा गया था। इसे समिति ने मंजूरी दी। 

    प्रॉपर्टी हस्तांतरण फीस होगी माफ़ 

    स्थायी समिति और एक निर्णय लिया गया। इस बारे में समिति के अध्यक्ष हेमंत रासने ने कहा कि कोरोना से लोग जूझ रहे है। उनके आय में कमी आने से उन पर वित्तीय संकट है। मनपा उन्हें राहत दिलाने का फैसले ले रही है। उसीके आधार पर अब प्रॉपर्टी हस्तांतरण फीस पूरी तरह से माफ़ की जाएगी। रासने ने कहा कि प्रॉपर्टी वारिस पंजीयन करना आवश्यक होता है क्योंकि कर भरने वाली व्यक्ति की मृत्यु हुई तो वारिस का नाम लगवाया जाता है। उसके लिए पंजीयन फीस ली जाती है। वारिस का पंजीयन करते समय कोई गड़बड़ी नहीं होती है, लेकिन लोगों को वित्तीय संकट से राहत दिलाने के लिए यह फीस माफ़ करने का फैसला लिया है।