Workers not coming to work at the original place

  • स्थायी समिति के समक्ष जलापूर्ति विभाग रखेगा प्रस्ताव

पुणे. कोरोना महामारी के चलते महापालिका के विकास काम नहीं हो पाए हैं. जब कोरोना की केसेस कम हुए तो महापालिका ने विकास कामों पर जोर देने का फैसला लिया था, लेकिन ऐन समय पर आचारसंहिता लागू हो गई. इस वजह से महापालिका के कामों की गति धीमी हो गई है. लेकिन अब 7 दिसंबर से फिर से कामों को गति मिल जाएगी. इसलिए अब प्रत्येक विभाग अपने अधूरे काम पूरा करने में जुट गया है. 

महापालिका जलापूर्ति विभाग को अब अपने पूंजीगत काम करने के लिए 30 करोड़ की आवश्यकता है. विभाग द्वारा इससे सम्बंधित प्रस्ताव जल्द ही स्थायी समिति के समक्ष रखा जाएगा.

मौजूदा साल में मनपा बजट पर कोरोना का संकट

मौजूदा साल में मनपा बजट पर कोरोना का संकट है. साथ ही पिछले 3 वित्तीय वर्षों की समीक्षा, पूंजीगत व्यय को देखते हुए यह देखा गया है कि पुणे शहर में विकास कार्यों पर खर्च महासभा द्वारा किए गए जो अनुमान से कम हैं. कुल व्यय में से राजस्व व्यय 65 से 70 प्रतिशत हैं और पूंजीगत व्यय 30 से 35 प्रतिशत है. वैकल्पिक रूप से पुणे शहर का विकास ठहराव के कगार पर है. वास्तविक जमा  सामान्य निकाय द्वारा दिए गए अनुमान के अनुसार नहीं है, व्यय प्रशासन द्वारा वहन किया जाना चाहिए जैसा कि यह है. मनपा  की आय बढ़ाने के लिए एक राजस्व समिति का गठन किया गया था.

जनवरी से शुरू होगी टेंडर प्रक्रिया

प्रत्येक विभाग के प्रमुख को राजस्व कमाने का लक्ष्य दिया जाता है. यदि विभाग का प्रमुख लक्ष्य को पूरा नहीं करता है, तो राजस्व को कम किया जा सकता है, लेकिन ऐसा प्रतीत नहीं होता है.  इसके विपरीत, वसूली की लागत बढ़ रही है. इन सभी के कारण अब मनपा प्रशासन ने सभी विभागों से जानकारी मांगी है. आगामी काल में कौन से काम महत्वपूर्ण करने है, इसकी जानकारी देने के लिए भी कहा गया था. इसकी टेंडर प्रक्रिया भी अब जनवरी माह में शुरू की जाएगी.