3500 hawkers license will be canceled, know what is the matter

    पुणे. पुणे महानगरपालिका (Pune Municipal Corporation) सीमा के अधिकृत फेरीवाला (Hawkers)जिन्होंने दूसरे किसी फेरीवाला से लाइसेंस (License)लिया है, उनके लिए हस्तांतरण शुल्क भरना अनिवार्य किया गया है। यह शुल्क 1 लाख से 2 लाख तक है, लेकिन यह शुल्क भरने को लेकर फेरीवाला उदासीन नजर आ रहे हैं। इससे पीएमसी (PMC) का भी नुकसान हो रहा है। इस वजह से अब महानगरपालिका अतिक्रमण विभाग ने सख्त रवैया अपनाया है। हस्तांतरण शुल्क भरने के विभाग ने फेरीवालों को 31 जनवरी तक की समय सीमा दी थी। यह समय सीमा अब ख़त्म हो चुकी है। जिन लोगों ने भुगतान नहीं किया है, उनके लाइसेंस रद्द की कार्रवाई का नियोजन शुरू किया गया है।

     मनपा की जांच में ऐसे 1,800 से अधिक फेरीवाले मिलें है। उनका लाइसेंस रद्द किया जाएगा। साथ ही महापालिका के सर्वे में करीब 1700 लोग अपने जगह पर नहीं मिले थे। ऐसे कुल 3,500 फेरीवालों को अवैध ठहराकर उनका लायसेंस रद्द किया जाएगा। ऐसी जानकारी अतिक्रमण विभाग के प्रमुख माधव जगताप द्वारा दी गई है। 

    25 हजार से 2 लाख तक का शुल्क 

    महानगरपालिका की ओर से ठेला, पथारी जैसे व्यवसाय करने के लिए स्टॉल वितरित किए थे। 1989 साल में यह तादाद लगभग 7792 थी। बाद में इसमें से कई लाइसेंसधारी अपने लाइसेंस को उत्तराधिकार के अधिकार या पारस्परिक रूप से दूसरों को हस्तांतरित करते हैं। जिन्होंने इस तरह के लाइसेंस प्राप्त किए हैं और वर्तमान में अपने दम पर व्यवसाय कर रहे हैं, उन्हें पुणे मनपा की लागू हॉकर्स अधिनियम नीति के तहत अपना खुद का लाइसेंस कंप्यूटर पंजीकरण द्वारा करना अनिवार्य किया गया है। आम सभा ने यह नियमावली बनाई थी। अतएव यह उम्मीद की गई थी कि कि समझौता शुल्क का भुगतान करके लाइसेंस अपने नाम पर प्राप्त करने की प्रक्रिया पहले की जाएगी। हालांकि, कई व्यवसायिकों ने संबंधित क्षेत्र कार्यालय में शुल्क का भुगतान नहीं किया है। इसमें महानगरपालिका का नुकसान हुआ है क्योंकि जोन के अनुसार यह शुल्क 25 हजार  से 2 लाख तक है।

    शहर फेरीवाला समिति में लिया था निर्णय 

     इसको लेकर हाल ही शहर फेरीवाला समिति की बैठक में चर्चा हुई थी। इसमें लिए गए निर्णय के अनुसार, इस तरह के व्यवसायिओं द्वारा आपसी विरासत अधिकारों द्वारा एक दूसरे से खरीदे गए आधिकारिक लाइसेंस संबंधित क्षेत्र के कार्यालय के लिए अपने स्वयं के नाम के वर्गीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेजों को पूरा करने के लिए  आवेदन की अंतिम तिथि 31 जनवरी तक दी गई थी। इस समय सीमा के बाद उपरोक्त मामलों में से कोई भी आवेदन समय सीमा के बाद स्वीकार नहीं किया जाएगा। साथ ही ऐसे फेरीवालों का लाइसेंस रद्द किया जाएगा।  आवेदन किए जाने वाले दस्तावेजों की जानकारी संबंधित क्षेत्र कार्यालय के पास उपलब्ध होगी। उसके अनुसार फेरीवालों पर कार्रवाई करने का नियोजन अतिक्रमण विभाग द्वारा किया गया है। कार्रवाई के अधिकार क्षेत्रीय कार्यालय स्तर पर दिए गए है। जगताप के अनुसार हमारी जांच में 1800 से अधिक फेरीवाला दोषी पाए गए हैं, उन पर कार्रवाई की जाएगी।

    मनपा द्वारा किया था सर्वे 

    इस बीच, महानगरपालिका द्वारा शहर के अवैध फेरीवाला जांचने के लिए सर्वे किया गया था। जो लाइसेंसधारी फेरीवाला जगह पर थे, उनका पंजीयन किया किया गया, लेकिन कई फेरीवाला ऐसे थे जो लाइसेंस होने के बावजूद अपने जगह पर नहीं थे क्योंकि पंजीयन होने के बाद उन पर शुल्क भरना अनिवार्य है। यह टालने के लिए ये लोग वहां नहीं थे। मनपा के सर्वे में ऐसे 1700 से अधिक लोग पाए गए हैं। उनका भी लाइसेंस अब रद्द किया जाएगा। पीएमसी जल्द ही यह कार्रवाई करेगी। ऐसा माधव जगताप ने कहा।