encroachment

    पुणे. पुणे के अंबिल ओढ़ा (Ambil Odha) इलाके में गुरुवार सुबह से अतिक्रमण (Encroachment ) हटाने का काम शुरू हो गया था। पुणे महानगरपालिका (Pune Municipal Corporation) ने इसके लिए लोगों को पहले से नोटिस (Notice) देकर आगाह किया, लेकिन इस बार नागरिकों ने आक्रामक रुख अपनाया और कार्रवाई का कड़ा विरोध किया।

    उधर, महानगरपालिका कोर्ट ने कार्रवाई पर रोक (Stop) लगाने का फैसला किया है। इस संबंध में हनुमंत फड़के ने महानगरपालिका न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। वहां आपात्कालीन सुनवाई हुई। अदालत ने अगले आदेश तक कार्रवाई स्थगित कर दी। उसके अनुसार, महानगरपालिका ने कार्रवाई रोक दी है। 

    पहले पुनर्वसन करें 

    अदालत के आदेश के अनुसार, कार्रवाई इलाके के परिवारों को विस्थापित कर देगा। उनका पुनर्वास को लेकर कोई योजना अदालत के सामने नहीं है। ऐसे में नागरिकों के घर को तोड़ना उचित नहीं होगा। कहा गया कि इन नागरिकों के पुनर्वास तक महानगरपालिका की अतिक्रमण कार्रवाई को स्थगित करें। इसके अनुसार प्रशासन ने कार्रवाई रोक दी है। इससे यह कार्रवाई के दौरान शुरू हुए नागरिक और प्रशासन के बीच तीव्र संघर्ष को अस्थायी रूप से समाप्त करने की संभावना है। 

    पुलिस ने 100 लोगों को किया गिरफ्तार

    पुलिस ने पुणे में अंबिल धारा के पास कार्रवाई का विरोध कर रहे 100 लोगों को गिरफ्तार किया है। इसके बाद एक बार फिर कार्रवाई शुरू हो गई थी। पुणे शहर में दांडेकर पुल के पास अंबिल ओढ़ा के पास के क्षेत्र में नगर निगम द्वारा अतिक्रमण की कार्रवाई की जा रही है। क्षेत्र में बाढ़ को रोकने के लिए अंबिल ओढ़ा की लंबाई-चौड़ाई बढ़ाने का काम किया जा रहा है। साथ ही यह कॉस्टिंग वॉल भी बनाई जा रही है। क्षेत्र में एक झुग्गी पुनर्वास योजना भी लागू की जा रही है। हालांकि आज सुबह से ही इस कार्रवाई का नागरिकों ने कड़ा विरोध किया। 

    आत्मदाह का भी प्रयास किया गया

    कार्रवाई का विरोध करने के लिए आत्मदाह का भी प्रयास किया गया। इसी पृष्ठभूमि में पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे नागरिकों को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया था। पुलिस ने विरोध कर रहे 100 लोगों को गिरफ्तार किया। दत्तावाड़ी पुलिस ने कहा कि विरोध करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद कार्रवाई की गई है और यहां घरों को तोड़ा जा रहा है। इस बीच, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इन सभी लोगों को ट्रांजिट कैंप में ठहराया गया है। 

    क्या है मामला?

    अंबिल ओढ़ा कात्रज झील से शुरू होता है। अंबिल ओधा क्षेत्र में एक स्लम पुनर्वास परियोजना की घोषणा की गई है। इसके मुताबिक नागरिकों का आरोप है कि पुणे नगर निगम ने नदी के प्राकृतिक बहाव को बदलने की योजना बनाई है। साइट बिल्डर के गले में डालने का दावा करते हुए नागरिकों ने विरोध किया है। विध्वंस शुरू होने के बाद से अंबिल ओढ़ा के विरोध ने तनाव पैदा कर दिया है। कुछ लोगों ने शरीर पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगाने का प्रयास किया। अंबिल धारा में पुलिस की एक बड़ी टुकड़ी को तैनात किया गया है। अंबिल धारा को जोड़कर कई जगहों पर निर्माण कार्य किया गया है।   नतीजा यह है कि बरसात के दिनों में कई बार पानी आसपास की बस्तियों में घुस जाता है और नुकसान पहुंचाता है। प्रशासन बार-बार नालों में पानी भर रहा है, प्राकृतिक जल ढोने वाली धाराओं में पानी भर रहा है। परिणामस्वरूप, अम्बिल धारा की वहन क्षमता 60 प्रतिशत तक कम हो गई है। इस वजह से प्रशासन ने वहां से नागरिकों को हटाने को लेकर नोटिस दी थी। 

    उपायुक्त पर फेंके पत्थर 

    महानगरपालिका द्वारा कुल 134 घर हटाने को लेकर योजना बनाई थी क्योंकि आम्बील ओढ़ा के ऊपर ही लोगों ने घर बनाए है। मनपा द्वारा इलाके में ओढ़ा का काम किया जा रहा है। इस वजह से ये घर हटाना आवश्यक है। उसके लिए प्रशासन द्वारा इन घर मालिकों को तीन माह पहले नोटीस दी थी। फिर भी लोग हटने को तैयार नहीं है। प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की। लगभग 50 घर हटा दिए। इसमें पुलिस व अतिक्रमण विभाग के कर्मियों का समावेश था। कई लोग खुद वहां से निकल चुके है, लेकिन जो हटने को तैयार नहीं थे, उन्होंने हंगामा करना शुरू किया। पत्थर बाजी करना भी शुरू किया। उपायुक्त अविनाश सपकाल भी इसका शिकार हुए। लेकिन उन्होंने खुदको बचा लिया। 

    लोगों को नोटिस देकर हम उन्हें हटने के लिए कह रहे थे। राजेंद्र नगर में उनका पुनर्वास करने के लिए हमने घर बनाए है। फिर भी लोग मानने को तैयार नहीं है। बारिश में इलाके में पानी जमा होकर कोई दुर्घटना न हो, इसलिए कार्रवाई करना आवश्यक था। हम कार्रवाई कर रहे थे, लेकिन कोर्ट के निर्देश के बाद हमने कार्रवाई रोक दी है।

    -अविनाश सपकाल, उपायुक्त, पुणे महानगरपालिका