आंबेमोहोर चावल दामों में वृद्धि

  • मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश से हो रही आवक

पुणे. पुणे और आसपास के ग्राहकों में विशेष रूप से प्रिय आंबेमोहोर चावल (Ambemohar Rice) की कीमतों (prices) में इस वर्ष भारी वृद्धि हुई है.

चावल के मौसम की शुरुआत में प्रमुख रूप से मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) और आंध्र प्रदेश (Andra Pradesh) से आंबेमोहोर चावल की आवक होती है. इस वर्ष चावल की कीमतों में पिछले वर्ष की तुलना में प्रति क्विंटल लगभग 800 से 1000 रुपयों की वृद्धि हुई है.

नए चावल बाज़ार में आए

इस वर्ष के नए चावल के मौसम की अब शुरुआत हुई है. सभी प्रकार के नए चावल अब बाज़ार में आए हैं, अन्य प्रकार के चावलों की कीमतों में खास बदलाव नहीं हुए हैं, लेकिन आंबेमोहोर चावल को अच्छा-खासा भाव मिलता हुआ दिखाई दे रहा है. मध्य प्रदेश से लचकारी कोलम चावल (Kolam rice) भी मौसम के आरंभ में आता है. उनके भाव भी प्रति क्विंटल लगभग 400 से 500 रुपए से बढ़े हैं. इसके अलावा अन्य किसी भी चावल के भाव में बदलाव नहीं हुआ.

गैर-बासमती चावल की मांग खासी बढ़ी 

चावल के व्यापारी और निर्यातक राजेश शाह ने कहा कि, कीमतों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण यह है कि पिछले 2-3 वर्षों से आंबेमोहोर चावल का निर्यात बढ़ा है. अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका आदि स्थानों से आंबेमोहोर के साथ गैर-बासमती चावल की मांग खासी बढ़ी है. इस वर्ष अन्य निर्यातक देशों में अनियमित बारिश, अतिवृष्टि और अकाल जैसी प्राकृतिक आपदाएं आई हैं. वहां चावल का उत्पादन कम हुआ है. इसलिए भारत के चावल को मांग बड़े पैमाने पर बढ़ने से निर्यात और भाव भी बढ़े हैं.

कम होती जा रही है पारंपरिक बासमती चावल की बुआई 

पारंपरिक बासमती चावल की बुआई पिछले 3-4 वर्षों से लगातार कम होती जा रही है. पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश के किसान पारंपरिक बासमती चावल की बजाय 1121 प्रकार के बासमती चावल की खेती कर रहे हैं. इस प्रकार का 80% बासमती चावल स्टीम करके निर्यात के लिए, होटल अथवा केटरिंग और इंस्टीट्यूशनल उपयोग में लाया जाता है. हमारे यहां लोकप्रिय हो चुके पारंपरिक बासमती (Basmati) चावल के टुकड़ा दुबार, मिनी दुबार, मोगरा और कणी की अत्यधिक कमी महसूस हो रही है. बासमती टुकड़ा प्रकार के चावल की आवक कम होने से ग्राहक फिर से आंबेमोहोर, कालीमूछ, लचकारी कोलम, इंद्रायणी और सोनामसुरी प्रकार के चावल की ओर मुड़े हैं.