टैक्स बकाएदारों के लिए अभय योजना घोषित करें

  • भाजपा शहर अध्यक्ष जगदीश मुलिक का सुझाव

पुणे. भाजपा शहर अध्यक्ष जगदीश मुलिक ने मनपा पदाधिकारियों की एक बैठक में सुझाव दिया कि महापालिका की राजस्व आय बढ़ाने के उद्देश्य से आयकर बकायादारों के लिए अभय योजना की घोषणा की जानी चाहिए.

मनपा की आय पर असर

मुलिक ने कहा कि कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण सुरक्षा के तौर पर पुणे शहर को 4 महीने से अधिक समय तक बंद रखा गया था. परिणामस्वरूप, शहर के आम नागरिकों, मजदूरों, व्यापारियों, व्यापारियों सभी स्तरों पर वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा. अगले 2 महीनों के बाद भी आर्थिक स्थिति ठीक होती नहीं दिख रही है. नजीता महापालिका के राजस्व पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा है. मुलिक ने आगे कहा कि मनपा  की राजस्व आय में 4700 करोड़ रुपये का टैक्स बकाया है.  इसमें मूलधन में 2,100 करोड़ रुपये और जुर्माना में 2,500 करोड़ रुपये शामिल हैं. जुर्माने की राशि में अत्यधिक कटौती से करदाताओं को राहत मिल सकती है.  इससे बकाया की वसूली हो सकती है. वैकल्पिक रूप से राजस्व बढ़ाकर विकास कार्य को गति दी जा सकती है. इस वजह से अभय योजना घोषित करने की मांग मुलिक ने की है.

एनसीपी के आंतरिक विवाद के कारण भामा-आसखेड़ में देरी

मुलिक ने कहा कि राज्य में भाजपा के 5 साल के शासनकाल के दौरान, भामा-असखेड़ जल परियोजना का 95 प्रतिशत काम पूरा हो गया था, लेकिन एनसीपी के भीतर आंतरिक विवादों के कारण इस परियोजना में देरी हुई है. सरकार पिछले एक साल में शेष 5 प्रतिशत को पूरा करने में विफल रही है. हालांकि, भाजपा पुणे के लोगों को भामा-आसखेड़ का पानी उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए वह पूरी कोशिश करेगी. मुलिक ने कहा कि एनसीपी के खेड़ विधायक दिलीप मोहिते ने सीधे तौर पर पुणे और पिंपरी को भामा-आसखेड़ का पानी न देने की धमकी दी है. भामा-आसखेड़ योजना के बारे में एनसीपी में एकमत नहीं है. स्थानीय विधायक केवल बैठकें करने की योजना बना रहे हैं. परियोजना को पूरा करने के उद्देश्य से वास्तव में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं. मुलिक ने कहा कि भामा-आसखेड़ योजना शहर के पूर्वी हिस्से जैसे वाडगांव शेरी, चंदननगर, कलस, धनोरी, विश्रांतवाड़ी, येरवडा  में पानी की समस्या को हल करने के लिए 7 साल से चल रही है. इस परियोजना की क्षमता 200 एमएलडी है. योजना की लागत लगभग 418 करोड़ रुपये है. हालांकि, इस योजना में परियोजना प्रभावित किसानों को मुआवजे का मुद्दा  सरकार को विफल कर रहा है. इसलिए परियोजना में देरी हो रही है.