Pimpri-Chinchwad Municipal Corporation

  • नगरसचिव के साथ धक्कामुक्की

पिंपरी. विधानसभा चुनाव से चली आ रही भाजपा विधायक और शिवसेना गुटनेता के बीच की सियासी रंजिश की गूंज पिंपरी चिंचवड़ मनपा (Pimpri Chinchwad Municipal Corporation) गलियारों में अब तक सुनाई दे रही है। कुछ दिन पहले सभागृह नेता की कैबिन के दरवाजे पर धक्कामुक्की हुई थी और अब  स्थायी समिति की साप्ताहिक बैठक में गिलास पटककर माइक की तोड़फोड़ की गई।

विधान परिषद चुनावों के बाद हुई पहली स्थायी समिति की बैठक में फिर घमासान मचा। यहां भाजपा विधायक लक्ष्मण जगताप और शहराध्यक्ष व विधायक महेश लांडगे के गुटों के  बीच जमकर विवाद के बाद जगताप समर्थकों ने खूब तोड़फोड़ मचाई। यही नहीं सभापति संतोष लोंढे के कहने पर सभा का कामकाज शुरू करने की कोशिश करने वाले मनपा के नगरसचिव उल्हास जगताप के साथ भी धक्कामुक्की की गई।

बुलानी पड़ी पुलिस

हालात बिगड़ते देख मनपा के सुरक्षा विभाग ने फिर एक बार पुलिस को बुलवाया। हंगामे के बीच बैठक स्थगित किये जाने की घोषणा के साथ घमासान भी शांत हो पाया। इस बैठक में हुए ‘घमासान’ की वजह फर्जी एफडीआर के मामले में प्रशासन से जवाब न मिलना बताना बताया गया है। साथ ही कोई हंगामा होने की बात को सिरे से नकारा गया। दोनों हंगामे के पीछे की असली वजह शिवसेना गुटनेता राहुल कलाटे के प्रभाग में 51 करोड़ रुपए की लागत वाली सड़क विकास की योजनाओं को लेकर कलाटे और विधायक जगताप के बीच सियासी संग्राम है।

विधान परिषद की पुणे स्नातक और शिक्षक मतदाता निर्वाचन सीटों चुनाव की आचार संहिता समाप्त हो गई है। इसके बाद स्थायी समिति की पहली बैठक हुई। इस बैठक में जगताप समर्थक नगरसेवक वाकड़ की सड़क विकास परियोजनाओं को लेकर ‘प्रहार’ करने की तैयारी में थे। अंबरनाथ कांबले, अभिषेक बारणे और शशिकांत कदम समेत जगताप समर्थकों ने सभापति संतोष लोंढे और मनपा आयुक्त श्रावण हार्डिकर से जवाब मांगते हुए हंगामा मचाना शुरू कर दिया। 

देखते ही देखते बात बढ़ गई और आक्रोशित सदस्यों ने माइक, ग्लास, प्लेट आदि की तोड़फोड़ करनी शुरू कर दी। इसी बीच सभा का कामकाज शुरू करने की कोशिश की गई तो नगरसचिव उल्हास जगताप के साथ धक्कामुक्की भी की गई। नतीजन सभागृह में पुलिस बुलाने की नौबत आ गई। इसी बीच बैठक स्थगित कर दी गई।

सभागृह नेता ने हंगामें से किया इनकार

सभागृह नेता नामदेव ढाके और आक्रोशित सदस्यों ने संवाददाताओं के साथ की गई बातचीत में कोई हंगामा होने की बात से इनकार कर दिया। मनपा में फिलहाल गूंज रहे फर्जी एफडीआर के मामले में मनपा आयुक्त से जवाब मांगा गया। सभापति ने अगली बैठक में जानकारी देने की बात कही, जबकि सदस्य तुरंत जवाब मांग रहे थे। इसी बात पर कहासुनी हो गई। हालांकि इस हंगामे की सही वजह भाजपा के वरिष्ठ विधायक लक्ष्मण जगताप और शिवसेना गुटनेता राहुल कलाटे के बीच विधानसभा चुनाव से शुरू सियासी रंजिश है। कलाटे के वाकड, ताथवडे, पुनावले प्रभाग में सड़क विकास के करीबन 75 करोड़ और स्कूल इमारत के निर्माण के 24 करोड़ कुल 100 करोड़ रुपए के प्रस्ताव को स्थायी समिति में जगताप गुट के नगरसेवकों ने विरोध जताया था। भाजपा के दूसरे विधायक एवं शहराध्यक्ष महेश लांडगे के समर्थक नगरसेवकों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था।

कलाटे और जगताप गुट के बीच है रंजिश

इस तरह से दो प्रस्ताव मंजूर कराने में कलाटे ने सफलता पायी। इस पर आगबबूला हुए जगताप समर्थकों ने अन्य दो प्रस्ताव खारिज कर मात दी। कलाटे ने इसकी शिकायत राज्य के नगर विकास विभाग से की। इसे संज्ञान में लेकर नगरविकास विभाग ने मनपा आयुक्त हार्डिकर से राय मांगी। उन्होंने अपने अभिप्राय में कहा कि वाकड में तेजी से बढ़ते नागरिकरण, विकास और यातायात के मद्देनजर इन सड़कों को विकसित करने की आवश्यकता बताई। इसके बाद सरकार ने स्थायी समिति द्वारा बिना किसी कारण के खारिज किए गए इन प्रस्तावों को निलंबित कर दिया। इसके बाद से विधायक लक्ष्मण जगताप के खेमे में कड़ी नाराजगी है। स्थायी समिति की बैठकों में लगातार हो रहे हंगामे के पीछे यही नाराजगी जिम्मेदार बताई जा रही है।