सभी चीनी वस्तुओं का बहिष्कार करें सरकार

– मराठवाड़ा जनविकास संघ की मांग

पिंपरी. भारत-चीन के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए अखिल भारतीय व्यापारी महासंघ (कैट) ने चीन में बनी वस्तुओं का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है. इस निर्णय को उचित करार देते हुए राज्य के मुख्यमंत्री से भी चीनी वस्तुओं का पूरी तरह से बहिष्कार करने की मांग मराठवाड़ा जनविकास संघ के अध्यक्ष अरुण पवार ने की है. पवार ने कहा कि इससे स्वदेशी वस्तुओं को प्रोत्साहन मिलेगा. इस मांग का ज्ञापन अरुण पवार ने हाल ही में विभागीय आयुक्त डॉ. दीपक म्हैसेकर को सौंपा. इस समय सामाजिक कार्यकर्ता शंकर तांबे भी उनके साथ थे. इस ज्ञापन की एक प्रति मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को भी भेजी गई है.

अपने ज्ञापन में अरुण पवार ने चीन पर आरोप लगाया है कि अब तक लगभग सभी विशेषज्ञों ने इस बात की पुष्टि की है कि कोविड-19 को चीन ने इजाद कर पूरी दुनिया में फैलाया है, लेकिन अपनी इस अमानवीय गलती को स्वीकार करने की बजाया चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है. भारतीय सीमा पर भी चीन की गुंडागर्दी जारी है. 

चीनी वस्तुओं का बहिष्कार करें

भारत और चीन के बीच सेना स्तर पर चर्चा के दौरान चीनी सैनिकों ने पूर्व लद्दाख के गलवान घाटी में धोखे से भारतीय सैनियों पर हमला किया, जिसमें हमारे 20 सैनिक शहीद हो गए. हालांकि हमारे सैनिकों ने पूरी बहादुरी से उनका मुकाबला किया और उनके भी करीब 40-45 सैनिकों को मार गिराया है. अब भारत सरकार ने सैनिकों को जरूरत पड़ने पर गोली चलाने का भी आदेश दे दिया है. अब भारतीय सेना उचित अवसर आने पर चीन को उसकी जगह दिखाने से पीछे नहीं हटेंगे. लेकिन कुछ जिम्मेदारी देश के नागरिकों की भी है. यदि देश के 130 करोड़ नागरिक चीनी वस्तुओं का बहिष्कार करें, तो चीन की आर्थिक हालत खराब की जा सकती है. क्योंकि चीन भारत में अपना माल बेच कर उससे मिलनेवाले लाभ का उपयोग हमारे ही खिलाफ कर रहा है.

प्रत्येक नागरिक चीन को सबक सिखा सकता है

चीनी वस्तुओं का बहिष्कार कर देश का प्रत्येक नागरिक चीन को सबक सिखा सकता है. इसीलिए मराठवाड़ा विकास संघ ने चीन को सबक सिखाने के लिए चीनी वस्तुओं के बहिष्कार का निर्णय लिया है. यदि राज्य सरकार भी चीनी वस्तुओं का बहिष्कार करें, तो चीन को एक बड़ा सबक सिखाया जा सकता है.