AMRUT

    पिंपरी. केंद्र सरकार की अमृत परियोजना (AMRUT Project) के तहत पिंपरी चिंचवड़ महानगरपालिका (Pimpri Chinchwad Municipal Corporation) द्वारा 122 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है। नियमानुसार टेंडर की मियाद (Tender Period) 45 दिन रखने की बजाय 28 दिन तय किये जाने से विवाद शुरू होने के बाद अब टेंडर की शर्तों और नियमों में बदलाव लाए जा रहे हैं। इससे यह टेंडर प्रक्रिया विवाद और संदेह से घिर गई है। इस पर राष्ट्रवादी कांग्रेस के विधायक अण्णा बनसोडे (MLA Anna Bansode) ने टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की सूचना दी है। इस बारे में उन्होंने महानगरपालिका आयुक्त राजेश पाटिल (Municipal Commissioner Rajesh Patil) को पत्र भेजा है। 
     
    विधायक ने बताया कि, पिंपरी चिंचवड़ महानगरपालिका प्रशासन 122 करोड़ रूपए का टेंडर जारी किया है। इतने बड़े प्रोजेक्ट के लिए टेंडर सेल की अवधि नियमानुसार 45 दिन तय होनी चाहिए थी। इसके बाद भी प्रशासन ने इस अवधि को घटाकर 28 दिन कर दिया है, जो संदेह का विषय है। यदि पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका राजनीतिक संबद्धता से ठेकेदार के हितों के लिए टेंडर प्रक्रिया संचालित कर रहा है तो यह आम जनता के हित में नहीं होगा। वास्तव में, केंद्र सरकार के राष्ट्रीय सुधार मिशन (अमृत) के तहत महानगरपालिका सीमा में सीवरेज सिस्टम प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। कानूनी कारणों से पूरे नहीं हो पाने वाली सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और पंपिंग स्टेशनों के निर्माण की योजनाओं को ‘अमृत’ योजना के तहत शुरू किया जा रहा है।
     
     
    जिन अधिकारियों की वजह से पहले ये योजनाएं पूरी नहीं की गई उनके खिलाफ ठोस कार्रवाई की मांग भी उन्होंने कही है। इस परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया में ठेकेदार की सहायता के लिए अधिकारियों के साथ सलाहकार कंपनी की भूमिका भी संदिग्ध है। पिंपरी-चिंचवड वासियों के टैक्स के पैसे का इस तरह खर्च करना ठेकेदार के फायदे के लिए है? यह सवाल खड़ा हो गया है। महानगरपालिका प्रशासन के प्रमुख के रूप में आयुक्त को इस संबंध में उचित जांच करनी चाहिए। हमारी मांग है कि जांच में दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर टेंडर प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से कराई जाए। विधायक बनसोड़े ने कहा, ‘अगर महानगरपालिका प्रशासन विशेष ठेकेदार के हित में टेंडर प्रक्रिया में देरी करने की कोशिश करता है, तो हम इसके खिलाफ अदालत में याचिका दायर करेंगे।