हाथरस घटना के विरोध में निकला कैंडल मार्च

  • ‘आम्ही पुणेकर’ ने किया था आयोजन

पुणे. उत्तर प्रदेश के हाथरस में युवती की नृशंस हत्या कर दी गई. इसके खिलाफ आम्ही पुणेकर द्वारा शहर में कैंडल मार्च निकाला गया था. इसमें सभी क्षेत्रों के नागरिकों ने हिस्सा लिया.  

सर्वदलीय नेता हुए शामिल

लाल महल में राजमाता जिजाऊ और छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया गया और मशाल, कैंडल मार्च की शुरुआत महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस पार्टी के महासचिव, पूर्व विधायक और मशाल के संयोजक मोहन जोशी के तहत हुई. इनमें विधायक सुनील टिंगरे, कांग्रेस शहर अध्यक्ष रमेश बागवे, शिवसेना शहर प्रमुख संजय मोरे, पूर्व विधायक दीप्ति चौधरी, राकांपा की महिला मोर्चा अध्यक्ष स्वाति पोकले, शिवसेना महिला प्रमुख सविता मेटे, शेतकरी  कामगार पक्ष के सागर आल्हाट, आम आदमी पार्टी के शहर संयोजक, पूर्व मेयर दत्ता धनकवडे, पूर्व मेयर कमल व्यवहारे, सुभाष जगताप, अभय छाजेड़, रोहित तिलक, रवि धंगेकर, विजय देशमुख, गोपाल तिवारी, आदि नेता, गैर सरकारी संगठन के प्रतिनिधि उपस्थित थे. नागरिक राष्ट्रीय ध्वज, मोमबत्तियां और मशाल लेकर चल रहे थे. लोकायत संस्था के युवक और युवतियों ने नुक्कड़ नाटक और गीत प्रस्तुत किए.  मंडई में लोकमान्य तिलक की प्रतिमा का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया और जनसभा के साथ समापन हुआ.साथ ही पीड़ित को श्रद्धांजलि दी गई.

प्रधानमंत्री चुप क्यों?

हाथरस मामले में देश भर से नाराजगी की प्रतिक्रिया के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुप क्यों हैं? यह सवाल मोहन जोशी ने इस अवसर पर पूछा. बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, योजना कहां है, ऐसा भी सवाल जोशी ने उनसे किया. उन्होंने कहा कि महिलाओं के मुद्दे सामने आए हैं. हाथरस मुद्दे को संभालने में उत्तर प्रदेश सरकार की भूमिका संदिग्ध रही. यह हृदय विदारक था कि लड़की का अंतिम संस्कार रात में ही पुलिस बंदोबस्त में कर दिया गया. ऐसे में अगर मामला सीबीआई को सौंप भी दिया जाता है, तो क्या यह असली दोषियों को ढूंढ पाएगा? वक्ताओं ने इस पर संदेह जताया. वक्ताओं ने यह भी कहा कि नागरिकों को इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना से सीखे गए सबक के बारे में पता होना चाहिए.