वित्तीय अधिकारों का फिर विकेन्द्रीकरण!

  • क्षेत्रीय कार्यालय के साथ उप अभियंता को भी अधिकार  

पुणे. क्षेत्रीय कार्यालयों की कामकाज पद्धति पर महापलिका पूर्व कमिश्नर शेखर गायकवाड़ नाराज थे क्योंकि क्षेत्रीय कार्यालयों के काम से मनपा का नुकसान हो रहा है. इस वजह से उन्हें दिए गए एक-एक अधिकार अब छीन लिए जा रहे थे. क्षेत्रीय कार्यालयों से पथदीये खरीदी के अधिकार भी छीन लिए गए थे. उसके बाद उनके पास के पुरे वित्तीय अधिकार छीन लिए गए थे. इस बीच कोरोना से बजट पर मार पडी है. इसका सही तरीके नियोजन करने का फैसला मनपा कमिश्नर ने लिया था.  इस वजह से महापालिका में कोई भी काम, टेंडर, विज्ञापन निकालने से पहले मनपा कमिश्नर की मंजूरी लेनी होगी. 

यह निर्देश मनपा कमिश्नर गायकवाड़ द्वारा सभी विभाग प्रमुख, सहायक आयुक्त, उपायुक्त, क्षेत्रीय कार्यालयों को जारी किए थे. लेकिन अब कमिश्नर विक्रम कुमार ने इसमें बदलाव किया है. अधिकारों का विकेन्द्रकरण कर क्षेत्रीय कार्यालय से लेकर उप अभियंता तक सभी को यह अधिकार दिए गए है.

क्षेत्रीय कार्यालयों द्वारा की जाती है गड़बड़ी

ज्ञात हो कि महापालिका का काम तेज गति से हो, इस वजह से इन क्षेत्रीय कार्यालयों की रचना की गई है. शहर में कुल 15 क्षेत्रीय कार्यालय हैं. इसकी जिम्मेदारी सहायक आयुक्त पर दी गई है. इन लोगों के दायरे में 4 प्रभाग आते हैं. साथ ही उन्हें 10 लाख तक का विकास काम करने के अधिकार दिए गए है. आयुक्त के अधिकारों का विकेंद्रीकरण कर ये अधिकार दिए गए हैं. आयुक्त तक प्रस्ताव आने में देरी हो जाती है. इस वजह से क्षेत्रीय कार्यालय के तौर पर ही इसे मंजूरी मिलें, इस वजह से ये अधिकार दिए गए हैं. इस तरह के कई अधिकार इन लोगों को दिए गए हैं. लेकिन अब इन अधिकारों का ये लोग गैरइस्तेमाल कर रहे है. हाल ही में नजर आ रहा है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद साथ ही वर्क ऑर्डर देने के बाद विकास काम की जगह बदलने का प्रमाण बढ़ता जा रहा है. क्योंकि जगह एक दिखाई जाती है व काम दूसरी जगह पर किया जाता है. नगरसेवकों के दबाव के चलते प्रशासन को ये काम करना पड़ता है. जबकि उसके लिए स्वतंत्र टेंडर प्रक्रिया मुहैया करना जरूरी है. लेकिन ये मामले बढ़ रहे थे. इस वजह से दो साल पहले मनपा प्रशासन द्वारा इस पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे. लेकिन उस पर सही तरीके से अमल नहीं हो पा रहा है. इस वजह से पूर्व मनपा कमिश्नर ने इस पर गंभीरता से ध्यान दिया था.

इस्टीमेट बनाने के अधिकार में भी बदलाव

कोरोना वायरस के चलते लागू लॉकडाउन की वजह कई क्षेत्र प्रभावित हो चुके हैं. महापालिका के मौजूदा साल के बजट पर भी इसका असर हुआ है. क्योंकि राज्य सरकार के निर्देशानुसार अब बजट में प्रस्तावित एक भी नए योजना पर खर्चा नहीं किया जाएगा. सिर्फ देखभाल और मरम्मत के काम किए जाएंगे. उसके लिए सिर्फ 33 प्रतिशत निधि अदा किया जाएगा. साथ ही जो आवश्यक काम हैं, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी. इन कामों के लिए आवश्यक टेंडर, विज्ञापन निकालने से पहले मनपा कमिश्नर की मंजूरी लेनी होगी. हाल ही में यह निर्देश पूर्व मनपा आयुक्त द्वारा जारी किए है. साथ ही अगर किसी विभाग ने टेंडर प्रक्रिया पूरी की हो तो वर्क आर्डर देने से पहले मनपा कमिश्नर की अनुमति लेनी होगी. लेकिन अब कमिश्नर विक्रम कुमार ने इसमें बदलाव किया है. अधिकारों का विकेन्द्रकरण कर क्षेत्रीय कार्यालय से लेकर उप अभियंता तक सभी को यह अधिकार दिए गए है. क्षेत्रीय कार्यालय स्तर पर भी टेंडर जारी करने अनुमति दी है. साथ ही इस्टीमेट बनाने के लिए भी अधिकार पहले दिए गए है. कमिश्नर विक्रम कुमार के अनुसार, 10 लाख तक के इस्टीमेट बनाने का अधिकार उपअभियंता, 10-20 लाख तक कार्यकारीअभियंता, 20 लाख से 1 करोड़ तक के अधिकार विभाग प्रमुख, 1 करोड़ से 25 करोड़ तक के अधिकार अतिरिक्त आयुक्त के अध्यक्ष्यता में काम करनेवाली इस्टीमेट कमिटी को रहेंगे. तो 25 करोड़ से अधिक कामों के अधिकार कमिश्नर के अध्यक्ष्यता में काम करनेवाली इस्टीमेट कमिटी को रहेंगे.