आरक्षित सड़कों और भूमि अधिग्रहण के लिए दमनकारी शर्तो का बोझ मनपा पर ना डालें

  • कांग्रेस गुटनेता आबा बागुल ने राजस्व मंत्री से की मांग

पुणे.  पुणे शहर में HCMTR, कचरा मुद्दा, सड़क चौड़ीकरण और विभिन्न परियोजनाओं के लिए भूमि का अधिग्रहण और आरक्षित सड़कों को लेकर जो दमनकारी शर्ते होती है, वह मनपा पर ना डालें. उससे मनपा को बाहर करें.

 ऐसी मांग कांग्रेस गुटनेता आबा बागुल ने महाराष्ट्र राज्य कांग्रेस अध्यक्ष, महाराष्ट्र राज्य के राजस्व मंत्री बालासाहेब थोरात के साथ पुणे शहर के विकास को लेकर चर्चा करते समय की.

भूमि अधिग्रहण जरूरी

बागुल ने कहा कि लगभग 2000 किमी के क्षेत्र को कवर करने वाले पुणे शहर की 1987 और 2017 की विकास योजनाओं में भूमि के उपयोग (भूमि उपयोग को समायोजित करना) और प्रस्तावित भूमि उपयोग का वर्गीकरण है. उपयोग की जानेवाली भूमि का अधिग्रहण करना बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन भूमि अधिग्रहण नहीं हो रहा है क्योंकि महापालिका  की वित्तीय स्थिति दिन-ब-दिन कमजोर होती जा रही है. जबकि टीडीआर की दरें ऊपर और नीचे जा रही हैं, महापालिका  की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया बहुत धीमी गति से चल रही है. 2013 के संशोधित कानून के अनुसार, भूमि धारक भूमि अधिग्रहण करते समय नकद की राशि की मांग करता है.  बागुल के अनुसार इसलिए, भूमि अधिग्रहण में एक बड़ी समस्या है और धारा 19 की घोषणा करने से पहले नए भूमि अधिग्रहण अधिनियम में अधिसूचना के अनुसार, महापालिका  को संपादन मूल्य का 30% अधिग्रहण मूल्य का भुगतान करना होगा. यह राशि कलेक्टर को जमा करनी होती है, अंतिम फैसला घोषित होने तक यह राशि कलेक्टर के पास रहती है और महापालिका  को कोई ब्याज नहीं मिलता है.

मनपा को देना पड़ता है ब्याज

बागुल ने आगे कहा कि इसके विपरीत, जैसे ही धारा 19 घोषित की जाती है और अंतिम निर्णय घोषित किया जाता है, महापालिका  को अधिग्रहण मूल्य पर प्रति वर्ष 12 से 15% ब्याज देना पड़ता है.  इसलिए, महापालिका पर करोड़ों रुपये का बोझ आ रहा हैं जो सामान्य करदाताओं द्वारा इमानदारी से भुगतान किए गए कर पर चल रहे हैं. पुणे शहर में प्रमुख विकास परियोजनाएं और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के कारण प्रमुख सड़कों का चौड़ीकरण ठप है.  इसलिए महापालिका के लिए इस प्रोजेक्ट को पूरा करना मुश्किल हो रहा है. बागुल ने कहा कि  इसी प्रकार, महाराष्ट्र सरकार ने भूमि का अधिग्रहण करते समय 30 प्रतिशत अग्रिम भुगतान पर सिंचाई विभाग को रियायत दी है.  इसी तरह, शहर के लिए सड़क चौड़ीकरण और महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए भूमि का अधिग्रहण करते हुए, महापालिका को 30% राशि का भुगतान करने की दमनकारी स्थिति से छूट दी जानी चाहिए.