घर-घर जांच अभियान महज छलावा

  • भाजपा विधायक सिद्धार्थ शिरोले का सरकार पर आरोप
  • 9 लाख 42 हजार घरों में की गई जांच
  • 29 लाख 83 हजार नागरिकों की जांच की गई

पुणे. कोरोना के मरीजों की पहचान जल्दी हो सके ताकि उनका इलाज समय पर हो जाए और उनकी जान बच सके, इसलिए राज्य सरकार की ओर से ‘मेरा परिवार, मेरी जिम्मेदारी’ अभियान चलाई जा रही है. इसके अंतर्गत घर-घर जाकर मनपा के कर्मचारी लोगों के स्वास्थ्य की जांच कर रहे हैं. पर यह जांच महज एक छलावा है. लोगों को भ्रमित करने वाला है. इस जांच के कोरोना महामारी की शहर की तस्वीर स्पष्ट नहीं होती. उक्त आरोप शिवाजी नगर से बीजेपी विधायक सिद्धार्थ शिरोले ने लगाया है.

इस मुहिम में कई खामियां

विधायक ने कहा कि ‘मेरा परिवार, मेरी जिम्मेदारी’ संकल्पना अच्छी है, पर उसके तहत घर-घर जाकर स्वास्थ्य जांच करना दोषपूर्ण है. इस मुहिम के अंतर्गत कर्मचारी और स्वयंसेवकों को हर घर जाकर परिवार के हर सदस्य की जांच करनी होती है. पर ऐसा होता नहीं. घर के एक सदस्य से पूरे परिवार के लोगों की जानकारी मौखिक रूप से ले ली जाती है. उस जानकारी का सही आधार नहीं होता. परिवार की ओर से रक्तदाब, बुखार, मधुमेह की जानकारी ली जाती है. कम ही लोगों के पल्स, ऑक्सीजन, बुखार की जांच की जाती है. ऐसी शिकायतें मिल रही हैं. इस दोषपूर्ण मुहिम के कारण शहर के कोरोना महामारी का अंदाज लगा पाना मुश्किल है. ऐसा आरोप शिरोले ने किया.

1068 कर्मचारी, 2116 स्वयंसेवकों की तैनाती  

शिरोले ने कहा कि मनपा के अधिकृत आंकड़ों के अनुसार इस काम के लिए 1068 कर्मचारी, 2166 स्वयंसेवकों की तैनाती की गई है. अब तक 9 लाख 42 हजार घरों में जा कर इन लोगों ने 29 लाख 83 हजार नागरिकों की जांच की है. इसमें से 1226 कोरोना बाधित मरीज करीब पंद्रह दिनों में मिले. जबिक पुणे में हर रोज एक से डेढ़ हजार नए मरीज मिल रहे हैं. ऐसे में घर-घर जाकर जांच करना अच्छा लग रहा है पर प्रत्यक्ष में यह धोखा है. ऐसा आरोप शिरोले ने लगाया.

‘मेरा परिवार, मेरी जिम्मेदारी’ अच्छी मुहिम है पर इसका अमल दोषपूर्ण है. यह मुहिम बेहतर नजर आती है पर प्रत्यक्ष रूप में यह केवल छलावा है.  – सिद्धार्थ शिरोले, भाजपा विधायक, शिवाजीनगर