‘जेएनपीटी’ के निजीकरण का कर्मचारियों का विरोध

  • सांसद बारणे ने की केंद्रीय नौकानयन मंत्री से मुलाकात

पिंपरी. जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) के निजीकरण का स्थानीय कर्मचारियों द्वारा कड़ा विरोध किया जा रहा है. स्थानीय नागरिकों में भी इससे अशांति और बेचैनी बढ़ गई है. कर्मचारियों के सिर पर बेरोजगारी की तलवार लटक रही है. ऐसे में जेएनपीटी का निजीकरण न करें. 

मावल के शिवसेना सांसद श्रीरंग बारणे ने केंद्र सरकार से कर्मचारियों और स्थानीय लोगों का विचार करने का अनुरोध किया है. उन्होंने दिल्ली में केंद्रीय शिपिंग मंत्री मनसुख मांडविया से मुलाकात की.जेएनपीटी के निजीकरण का विरोध करनेवाले कर्मचारियों और स्थानीय लोगों द्वारा किये जा रहे विरोध से उनको अवगत कराया.

श्रमिकों के प्रतिनिधियों की  बैठक बुलाई थी

कंटेनर टर्मिनल का निजीकरण करने का भारत सरकार का प्रस्ताव केंद्र सरकार द्वारा विचाराधीन है, मगर जेएनपीटी के निजीकरण का कर्मचारियों, स्थानीय लोगों ने कड़ा विरोध किया है. इस पृष्ठभूमि के खिलाफ, सांसद बारणे ने दस दिन पहले श्रमिकों के प्रतिनिधियों की एक बैठक बुलाई थी. उनकी समस्याओं के बारे में जानने के बाद, उन्होंने आज दिल्ली में केंद्रीय शिपिंग मंत्री मांडविया से मुलाकात की और निजीकरण को लेकर कर्मचारियों एवं स्थानीय लोगों के विरोध, उनकी समस्याओं, समस्याओं को बताया.

निजीकरण का कोई प्रस्ताव केंद्र के पास विचाराधीन नहीं

जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट की स्थापना 1970 में नवसेवा गांव में हुई थी.इसके निर्माण के लिए स्थानीय किसानों की सात हजार एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया है.कई किसानों को उस समय उनकी जमीन का मुआवजा भुगतान नहीं दिया गया था. हालांकि, बाद की अवधि में 12.5 फीसदी रिफंड देने का फैसला किया गया.वह रिटर्न भी आज तक किसानों को नहीं मिला है.इस स्थिति में, केंद्र सरकार द्वारा कंटेनर टर्मिनल पोर्ट के निजीकरण पर विचार किया जा रहा है, जिसने स्थानीय लोगों में बेचैनी पैदा की है.साथ ही इस फैसले से कर्मचारियों की नौकरी भी खतरे में पड़ने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है. इस पर शिपिंग मंत्री मांडविया ने कहा कि जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) के निजीकरण का कोई प्रस्ताव केंद्र सरकार के विचाराधीन नहीं है.स्थानीय लोगों की नौकरियों को कोई खतरा नहीं है, मैं खुद इसकी गारंटी देता है. अगर इस बारे में कोई गलतफहमी है, तो मैं खुद जेएनपीटी में आता हूं.एक बैठक आयोजित कर कर्मचारी और स्थानीय लोगों की समस्याओं को समझेंगे.