General Assembly adjourned for the second consecutive time

    पिंपरी. पिछली बार स्थायी समिति सदस्यों (Standing Committee Members) की नियुक्ति (Appointment) के विषय पर हुए बवाल के चलते स्थगित की गई पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका (Pimpri-Chinchwad Municipal Corporation) की सर्वसाधारण सभा सोमवार को पुनः स्थगित कर दी गई। कोविड काल में कोविड केयर सेंटर (Covid Care Center) सेंटरों की आड़ में किये गए भ्रष्टाचार के आरोपों के मुद्दे पर विपक्षी दलों ने सत्तादल भाजपा को घेरने की तैयारी की थी। ‘बीजेपी हटाओ, मनपा बचाओ’ जैसे विरोधात्मक नारों से युक्त मेडिकल एप्रेन पहनकर विपक्षी दल के सदस्य सभागृह में दाखिल हुए, लेकिन उससे पहले ही महापौर से सभा स्थगन की घोषणा कर दी।

    महापौर ऊषा ढोरे की अध्यक्षता में हुई इस सर्वसाधारण सभा को पिछले बार स्थायी समिति सदस्यों की नियुक्ति के मुद्दे पर हुए बवाल के कारण स्थगित किया गया था। निर्दलीयों के मोर्चे के सदस्य की नियुक्ति के दौरान मोर्चे के गुटनेता कैलाश बारणे की गैरमौजूदगी पर विपक्षी दलों ने कड़ी आपत्ति जताई थी। इस हंगामे में एक-दूसरे पर दौड़े जाने और धक्कामुक्की करने तक की नौबत आयी थी। 

    भाजपा को घेरने की पूरी रणनीति बनाई थी

    आज स्थगित सभा का कामकाज होना था। हालांकि सीसीसी सेंटरों की आड़ में भ्रष्टाचार के आरोपों के मुद्दे पर विपक्षी दल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, शिवसेना के सदस्यों ने सत्तादल भाजपा को घेरने की पूरी रणनीति बनाई थी। इसकी भनक लगते ही सत्तादल ने पुनः एक बाद सभा स्थगन का हथियार इस्तेमाल किया।

    सभा 9 मार्च तक स्थगित

    विपक्षी दलों के नगरसेवक मेडिकल एप्रेन पहनकर सभागृह में दाखिल हुए। उनके एप्रेन पर बीजेपी हटाओ मनपा बचाओ जैसे नारे उल्लेखित थे। सत्तादल के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विपक्ष के सदस्य सभागृह में दाखिल हुए। हालांकि तब तक महापौर ने सभा स्थगित किये जाने की घोषणा की। सभा स्थगन की वजह बताते हुए सभागृह नेता नामदेव ढाके ने अजीब जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आज स्थायी समिति की बैठक थी, महापौर के पैरों में चोट लगी थी और उनके कार्यक्रम की अधिकता भी थी। इसके अलावा आम सभा के पटल पर उतने महत्वपूर्ण विषय भी नहीं थे, इसलिए आज की सभा 9 मार्च तक स्थगित रखी गई। हालांकि विपक्षी दलों की भूमिका स्पष्ट करते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नगरसेवक योगेश बहल और शिवसेना के गुटनेता राहुल कलाटे ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर विपक्षी दलों की आक्रामकता को ध्यान में लेकर सत्तादल ने मैदान छोड़कर भागने की भूमिका अपनाई।