झोपड़ी सेवाशुल्क और हस्तांतरण में आएगी तेजी

  • स्वास्थ्य निरीक्षक से इंजीनियर तक सभी की जिम्मेदारी तय
  • अतिरिक्त आयुक्त सुरेश जगताप ने दिए निर्देश
  • शहर की 40% आबादी झोपड़ों में रहती है

पुणे. शहर की लगभग 40% आबादी झोपड़ियों में रहती है. नतीजा काम का बोझ मनपा पर पड़ता है. इस वजह से महापालिका द्वारा इसका विकेन्द्रीकरण कर सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को इसके अधिकार दिए गए थे. फिर भी झोपड़पट्टी पुनर्विकास (Slum redevelopment) को गति नहीं मिल रही थी. 

ऊपर से बस्ती अधिकारी के तौर पर काम करने से काम सही तरीके नहीं हो पा रहा था. इसलिए अतिरिक्त आयुक्त सुरेश जगताप  (Additional Commissioner Suresh Jagtap) ने इसे गंभीरता से लिया.  काम करने की रचना बनाई है.स्वास्थ्य निरीक्षक (health inspector)  से लेकर जूनियर इंजीनियर (Junior engineer) तक सभी को किस तरह से काम करना है, इसकी जिम्मेदारी तय कर दी है. इससे काम में गति मिलेगी. ऐसा भरोसा अतिरिक्त आयुक्त सुरेश जगताप ने व्यक्त किया.

बस्ती अधिकारी के तौर पर कोई भी करता था काम

महापालिका के ज़ोनिपु विभाग के विकेंद्रीकरण और काम के दायरे पर विचार करने के कारण काम जल्द से जल्द पूरा करना है. महाराष्ट्र स्लम (सुधार उन्मूलन और पुनर्विकास की धारा 3 (एस) के प्रावधानों के अधीन रहकर इसके लिए उपायुक्त, सक्षम अधिकारी के रूप में सर्कल 5 प्रदान किए गए हैं. सर्कल 1 से 5 और उनके तहत सभी फील्ड कार्यालय, परिशिष्ट ‘ए ’के अनुसार, स्वास्थ्य निरीक्षक, क्लर्क टाइपिस्ट को काम करना पड़ता है.  स्वास्थ्य निरीक्षक और क्लर्क टाइपिस्ट ने सेवा शुल्क और पानी का बिल जमा करना, झोपड़ियों का स्थानांतरण, झोपड़ियों की मरम्मत का प्रस्ताव, बीएसयूपी में प्रभावित मलिन बस्तियों का पुनर्वास, अनधिकृत झोपड़ियों, प्रशासनिक कार्य, अदालत के काम, अन्य सहायक कार्यों पर कार्रवाई करनी है. लेकिन यह काम नहीं हो रहे थे. क्योंकि बस्ती अधिकारी के तौर पर कोई भी काम करता था. इससे काम सही तरीके नहीं हो पा रहा था. इस वजह से इस पर अतिरिक्त आयुक्त सुरेश जगताप ने गंभीरता से ध्यान दिया है. साथ ही काम करने की रचना बनाई है. स्वास्थ्य निरीक्षक से लेकर जूनियर इंजीनियर तक सभी ने किस तरह से काम करना है. इसकी जिम्मेदारी तय की है.

रचना तय की गई

जगताप के निर्देशानुसार, क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकार क्षेत्र के भीतर झुग्गियों से झोपड़ियों का स्थानांतरण और झोपड़ियों की मरम्मत साइट का दौरा करने और झोपड़ी का निरीक्षण करने के लिए  स्वास्थ्य निरीक्षक को जिम्मा दिया गया है.  गंदी बस्ती फोटो पास, सर्विस चार्ज रसीद, बिजली बिल, पानी बिल सहमति पत्र आदि दस्तावेजों की जांच कनिष्ठ अभियंता, उप अभियंता, अधीक्षक, करेंगे. बाद में प्रशासनिक स्वीकृति के बाद शासन के अनुसार शुल्क का भुगतान करके उन्नयन प्रमाणपत्र इसे झोपड़ी मालिक को दिया जाना चाहिए. यह काम स्वास्थ्य निरीक्षक को करना होगा. वर्तमान में झोपड़ी के लिए नए शुल्क के भुगतान के संबंध में स्थायी समिति के अनुसार, फील्ड ऑफिस के तहत झोपड़ी मालिक स्वास्थ्य के अनुसार, सेवा शुल्क का भुगतान करने के लिए आता है. इस पर निरीक्षक ने स्थल का दौरा करना और झोपड़ी का निरीक्षण करना होगा. अधीक्षक और उप अभियंता के माध्यम से जूनियर इंजीनियर या सहायक द्वारा भरे जाने का प्रस्ताव आयुक्त को प्रस्तुत किया जाना चाहिए. प्रस्ताव के अनुमोदन के बाद सेवा शुल्क के भुगतान के लिए कार्रवाई करना चाहिए. इस रचना के अनुसार सभी को काम करने के निर्देश दिए गए है.

शहर में लगभग 40% आबादी झोपड़ियों में रहती है. नतीजा काम का बोझ मनपा पर आता है. इस वजह से महापालिका द्वारा इसका विकेन्द्रीकरण कर सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को इसके अधिकार दिए थे. फिर भी झोपड़पट्टी पुनर्विकास को गति नहीं मिल रही थी. साथ ही बस्ती अधिकारी के तौर पर कोई भी काम करता था. इससे काम सही तरीके नहीं हो पा रहा था. इस वजह से इस पर हमने गंभीरता से ध्यान दिया है. साथ ही काम करने की रचना बनाई है. स्वास्थ्य निरीक्षक से लेकर जूनियर इंजीनियर तक सभी ने किस तरह से काम करना है. इसकी जिम्मेदारी तय की है. इससे काम में गति मिलेगी.

- सुरेश जगताप, अतिरिक्त आयुक्त, मनपा