दुनिया को विश्‍व शांति का राह दिखाएगी भारतीय संस्कृति

  • मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के इंद्रेश कुमार के विचार

पुणे. भगवान की भक्ति मानव जाति के लाभ के लिए है. वह कभी दूसरों को दुख नहीं देती. दूसरों की पीड़ा को आधार देते हुए उनकी पीड़ा को कम करना भारतीय संस्कृति है. 

अब यही संस्कृति देश को विश्‍व गुरू बनाएगी और दुनिया को विश्‍व शांति का राह दिखाएगी. यह विचार नई दिल्ली के मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के अध्यक्ष इंद्रेश कुमार ने व्यक्त किए.

दूसरों की मदद करो

एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनविर्सिटी, विश्‍व शांति केंद्र (आलंदी), माईर्स एमआइटी, पुणे और दार्शनिक ज्ञानेश्‍वर-संतश्री तुकाराम महाराज स्मृति व्याख्यान श्रृंखला न्यास के संयुक्त तत्वावधान में यूनोस्को अध्यासन द्वारा 24 से 30 नवम्बर के दरमियान 25वीं यानी रजत जयंती दार्शनिक संतश्री ज्ञानेश्‍वर-संतश्री तुकाराम महाराज स्मृति व्याख्यान श्रृंखला के ऑनलाइन तीसरे सत्र में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे. इंद्रेश कुमार ने कहा कि देश के संतो ने अनंत काल तक विश्‍व शांति प्राप्त करने के लिए सभी का जीवन आसान बना दिया है. सभी धर्मग्रंथों में इसका उल्लेख है कि दूसरों की मदद करो, अच्छे बनो, सहयोगी बनो. यह इस सिद्धांत के माध्यम से  समन्वय प्राप्त किया जाएगा और इस सद्भाव के माध्यम से सभी का विकास होगा. संतों ने समय समय पर इसके लिए मार्गदर्शन दिया है.

राम के पदचिन्हों पर चलने की जरूरत

विश्‍व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष चंत राय ने कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने जीवन को जिस तरह से जीया, उसे इस युग में मनुष्यों को पूरा करने की जरूरत है. केवल इस तरह के व्यवहार से सृष्टि को शांति का रास्ता दिखाया जा सकता है. राम ने कम उम्र में ही समाज के कष्टों को दूर करने का प्रयास किया. वह मर्यादा पुरूषोत्तम होने के साथ हर किसी को खुश रखनेवाले व्यक्तित्व हैं. उन्होंने अपने आचरण से दूसरों को सिखाया है. श्री राम ने अपने पूरे जीवन में कभी किसी को दोषी नहीं ठहराया. यह वह भूमिका है जिसे आज हमें निभाने की जरूरत है. इस अवसर पर आत्मसंतुलन विलेज के संस्थापक और कार्याध्यक्ष डॉ. बालाजी तांबे, जीवन विद्या मिशन के विश्‍वस्त प्रल्हाद वामनराव पै, कम्प्यूटर विशेषज्ञ पद्मभूषण डॉ. विजय भटकर, दिल्ली स्थित प्रदूषण नियंत्रण मंडल के पूर्वाध्यक्ष प्रा.एस.पी. गौतम सम्माननीय अतिथि के रूप में उपस्थित थे.