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पुणे. पुणे शिवाजीनगर स्थित जिला न्यायालय के परिसर से रहस्यमय तरीके से गायब हुए वकील उमेश चंद्रशेखर मोरे (33) को न्यायालय से अगवा कर उसकी हत्या करने के मामले में एक और वकील की गिरफ्तारी हुई है. घनश्याम दराडे नामक यह वकील पुणे एडवोकेट बार एसोसिएशन के सचिव हैं. 

गिरफ्तारी के बाद उसे अदालत में पेश किया गया जहां उसे 31 अक्टूबर तक पुलिस कस्टडी में भेजने का आदेश दिया गया. इस मामले में अब तक दो वकीलों को गिरफ्तार किया जा चुका है.मोरे की हत्या जमीन विवाद में होने की संभावना जताई जा रही है.

रिश्वतखोरी का मामला पहले से दर्ज

एड. उमेश मोरे के अपहरण और हत्या के मामले में पुलिस ने इससे पहले कपिल विलास फलके (34), दीपक शिवाजी वांडेकर (28) और रोहित दत्तात्रय शेंडे (32) को गिरफ्तार किया गया है. रोहित शेंडे खुद भी वकील है और वह शिवाजीनगर न्यायालय में वकालत करता है. आरोपी कपिल फलके और शेंडे के खिलाफ पुलिस में मामले दर्ज हैं. शेंडे के खिलाफ बंडगार्डन पुलिस थाने में रिश्वतखोरी का मामला दर्ज है जिसमें उमेश मोरे फरियादी थे. इस पूरी वारदात के पीछे पुणे की एक जमीन से जुड़ा बहुचर्चित विवाद जिम्मेदार रहने की जानकारी सामने आयी है. 2 साल पहले इसी विवाद में मोरे ने रिश्वतखोरी की शिकायत दर्ज कराई थी.इसमें वकील शेंडे और उच्चाधिकारी को गिरफ्तार किया गया था.

हत्या कर सबूत मिटाए

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 1 अक्टूबर को वकील उमेश मोरे शिवाजीनगर न्यायालय परिसर से अचानक से गायब हो गए थे. इस बारे में पुलिस में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी. वकीलों के संगठनों ने न्यायालय परिसर से एक वकील के रहस्यमय तरीके से गायब होने के मामले को गंभीर बताकर इसकी जांच की मांग की थी. मामले की जांच में जुटी पुलिस ने न्यायालय परिसर के सीसीटीवी कैमरे के फुटेज खंगाले तब जिस दिन मोरे गायब हुए थे उस दिन उनके साथ दो लोग संदिग्ध स्थिति में नजर आ रहे थे.इस आधार पर मामले की जांच करते हुए पुलिस ने तीनों आरोपियों को धरदबोचा.आरोपियों ने उमेश मोरे को न्यायालय परिसर से अगवा कर उसकी हत्या कर दी.इसके बाद सबूत मिटाने के लिहाज से उनकी लाश को ताम्हिणी घाट में ले जाकर उसे जला दिया. पुलिस को चकमा देने के लिए एक आरोपी ने वारदात के बाद मोरे का मोबाइल फोन एक चलते ट्रक में फेंक दिया. मगर उसकी चालाकी नहीं चली और कानून के लंबे हाथ उसके और उसके साथियों तक पहुंच ही गए.