जीवन पद्धति में बदलाव कर कोरोना के साथ जीना सीखें

– मनपा आयुक्त शेखर गायकवाड की मानें तो  लॉकडाऊन से समस्या हल नहीं होगी

 – श्री ओंकारेश्वर देवस्थान व सांसद गिरीश बापट की ओर से खाद्यान्न व किट की मदद करनेवालों का सम्मान

पुणे. हमारी आंखों को दिखाई न देनेवाले व किसी को भी हो सकनेवाले कोरोना के प्रार्दुभाव के बीच हम जी रहे हैं. उस पर से बरसात शुरू होने से अन्य रोग भी अपने पांव पसार रहे हैं. जिससे मरीजों की संख्या बढ़ रही है. इसलिए कोरोना के खिलाफ हमें यह लडाई दिन-रात शुरू रखनी होगी. पुणे के ओमकारेश्वर जैसे मंदिर ट्रस्ट व अन्य  सामाजिक संस्थाएं तथा प्रशासन के सहयोग से ही यह व्यवस्था टिकी हुई है. केवल लॉकडाउन से ही कोरोना की समस्या हल नहीं होनेवाली हमें जीवन पद्धति में बदलाव कर कोरोना के साथ ही जीना सीखना होगा. उक्त विचार पुणे मनपा आयुक्त शेखर गायकवाड ने व्यक्त किए.

श्री ओमकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट पुणे तथा सांसद गिरीश बापट की ओर से कोरोना बाधितों को भेाजन व बीडी कामगार, घरेलू कामगार, रिक्शाचालक, बारह बलुतेदारों को खाद्यान्न का किट देने के नेक कार्यों में सहभागी समाजसेवी कार्यकर्ताओंका सम्मान मंदिर के परिसर में किया गया. इस समय पुणे के पुलिस आयुक्त के. व्यंकटेशम, प्रमुख विश्वस्त धनोत्तम लोणकर, स्वरदा बापट आदि उपस्थित थे.

कोरोना के खिलाफ में लड़ाई तेज

 गायकवाड ने कहा कि  पुणे में वर्ष 1896 में प्लेग की महामारी फैली थी. उसका असर वर्ष 1912 तक रहा था. उस समय लगभग 2 लाख लोगों की जनसंख्या कम हो गई थी. आज 2020 में भी कोरोना के खिलाफ में लड़ाई तेज है. जरूरतमंदों के लिए महापालिका की ओर से शेल्टर कैंम्प बनाए गए हैं. जहां पर खाने  के साथ ही अन्य सुविधाएं देने के लिए स्वयंसेवी संस्था आगे आईं. यह समाज का नेक काम है. इसलिए कम से कम 1 साल तक हमें अपनी चिंता करते हुए अपने जीवन पद्धति में बदलाव करने होंगे.

पुणेकरों ने सराहनीय साथ दिया

के.व्यंकटेशम ने कहा कि लॉकडाऊन के समय में पुणेकरों ने सराहनीय साथ दिया. पुलिस व मनपा प्रशासन को इसके चलते बेहतर से काम करते आया. सामाजिक संस्थाओं ने भी इस समय अहम साथ दिया. सांसद बापट ने कहा कि आज समाज के सामने  कोरोना जैसी महामारी के रूप में बड़ा संकट खडा है. इस लॉकडाउन के समय हमने 10 हजार जरूरतमंद लोगों तक भोजन व खाद्यान्न किट की सुविधा दी. सांसद  निधि से भी मदद की. साथ ही पुलिस, मनपा व ओमकारेश्वर देवस्थान, निनाद पुणे जैसी संस्थाओं ने बिना किसी लाभ के मदद की.