लॉकडाउन के बाद लघु उद्यमी को महावितरण का ‘शॉक’

– एक महीने का बिजली बिल 80 करोड़ रुपए

पिंपरी. लॉकडाउन से उद्योग व्यवसाय की कमर टूट गई है. अनलॉक के पहले चरण में उद्यमियों को थोड़ी राहत मिली है. हालांकि महावितरण विभाग द्वारा उद्यमियों को शॉक पर शॉक दिये जा रहे हैं. ताजा मामला पिंपरी-चिंचवड़ की उद्योगनगरी का है. यहां लॉकडाउन के बाद संवरने की कोशिश में रहे एक लघु उद्यमी को एक माह के बिजली बिल के तौर पर 80 करोड़ रुपए का शॉक लगा है, जबकि इससे पहले उस उद्यमी को हर माह औसतन एक से डेढ़ लाख रुपए का बिजली बिल आता रहा था. महावितरण के इस मनमानी से लघु उद्यमी सकते में आ गया है. बहरहाल महावितरण ने अपनी गलती मानकर 84 हजार रुपए का दुरुस्त बिल जारी कर दिया है.

पिंपरी-चिंचवड लघु उद्योग संगठन के अध्यक्ष संदीप बेलसरे ने बताया कि पेठ संख्या 10 में संगठन के सदस्य की साई प्रोफाइल नामक कंपनी है. उन्हें लॉकडाउन के पहले हर माह औसतन एक से डेढ़ लाख रुपए तक बिजली बिल आता रहा है. हाल ही में महावितरण ने इस कंपनी का मई माह का बिजली बिल भेजा है. इसमें एक माह का बिल 80 करोड़ पांच लाख 89 हजार 850 रुपये का भेजा गया है.लॉकडाउन के बाद अब तक कंपनी का कामकाज पूरे प्रभाव से शुरू भी नहीं हो सका है. ऐसे में इतने बिजली इस्तेमाल होना संभव नहीं है. एक माह के लिए इतना ज्यादा बिल मिलने से कंपनी मालिक को शॉक लगा है.

84 हजार रुपए का नया बिल जारी किया

इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए लघु उद्योग संगठन के अध्यक्ष संदीप बेलसरे ने महावितरण के आला अधिकारियों के साथ एक बैठक की.उनके विभाग की मनमानी से उन्हें अवगत कराया.इसके बाद महावितरण ने अपनी गलती मानी और उक्त 80 करोड़ रुपए के बिल को दुरुस्त कर 84 हजार रुपए का नया बिल जारी किया.इसके अलावा बेलसरे ने बिजली विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की मनमानी की ओर भी आला अधिकारियों का ध्यानाकर्षित किया. बिजली आपूर्ति खंडित होने पर शिकायत नहीं सुनी जाती, फोन तक रिसीव नहीं किया जाता.कई जगहों पर बरसात पूर्व किये जाने वाले दुरुस्ती के काम नहीं किये गए हैं.परोक्ष स्पॉट पर आकर मीटर रीडिंग लेकर सही बिल देने और अपना मनमानी रवैया बदलने की मांग को लेकर संगठन की ओर से आंदोलन की चेतावनी भी बेलसरे ने दी है.