नए पात्र और अनुपस्थित छात्रों को सीईटी के लिए मिले अवसर

  • प्रा. रामदास झोल ने उठाई मांग

पुणे. राज्य सरकार द्वारा एमएचटी-सीईटी परीक्षा की पात्रता के लिए हाल ही में अंकों के ‘कट ऑफ’ की सीमा को कम कर दिया है. इस कारण से कम अंकों वाले जिन छात्रों ने सीईटी के फॉर्म तो भरे, लेकिन पहले के ‘कट ऑफ’ में अपात्र होने के कारण परीक्षा को अनुपस्थित रहें, ऐसे छात्रों का और कोरोना के भय से परीक्षा ना देने वाले छात्रों का शैक्षणिक नुकसान टालने के लिए उन्हें परीक्षा का एक अवसर दिया जाए, ऐसी मांग दत्तकला ग्रुप ऑफ इन्स्टिट्यूट्स के संस्थापक अध्यक्ष और एसोसिएशन ऑफ मैनेजमेंट ऑफ अनएडेड इन्स्टिट्यूट्स इन रूरल एरिया के अध्यक्ष प्रा. रामदास झोल ने उठाई है.

‘कट ऑफ’ में पात्र ना होने वाले कई छात्रों ने परीक्षा नहीं दी

एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से प्रा. झोल ने कहा है कि कोरोना महामारी के चलते इस वर्ष सीईटी परीक्षा को काफी विलंब हुआ. ऐसे में कोरोना महामारी के भय में पिछले करीब 4-5 महीने बीत गए. इस परीक्षा के लिए राज्य में लाखों छात्रों ने फॉर्म भरे. 12वीं के नतीजों के पश्चात सीईटी सेल की ओर से इस परीक्षा की पात्रता के लिए अंकों का ‘कट ऑफ’ घोषित किया. इस ‘कट ऑफ’ में पात्र ना होने वाले कई सारे छात्रों ने परीक्षा दी ही नहीं. 

उच्च शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र

इस बीच हाल ही में राज्य सरकार की ओर से सीईटी परीक्षा के लिए अंकों का ‘कट ऑफ’ कम कर दिया गया. इस कारण से कम अंकों वाले छात्र भी अब इस परीक्षा के लिए पात्र हो गए हैं, लेकिन तत्कालीन नियमों के तहत यह छात्र पात्र ना होने के उन्होंने परीक्षा दी ही नहीं. इसके अलावा पहले सरकार की ओर से सीईटी परीक्षा को तहसील स्तर पर आयोजित करने के संदर्भ में घोषणा की थी, लेकिन बाद में यह परीक्षाएं जिला स्तर लेने का फैसला लिया गया, जिससे कोरोना के भय के कारण कई सारे छात्र परीक्षा देने के लिए पहुंचे नहीं. ऐसी स्थिति में बड़ी संख्या में छात्र इस परीक्षा से वंचित रह गए है. ऐसे परीक्षा में अनुपस्थित रहने वाले और बाद में पात्र हुए छात्रों के लिए सीईटी परीक्षा का आयोजन कर उन्हें भी अवसर दिया जाए, ऐसी मांग प्रा. झोल ने की है.इस संदर्भ में उन्होंने राज्य के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री उदय सामंत को प्रा. झोल ने पत्र लिखकर मांग की है.