बीएमसी पर भगवे का किसी के पास पेटेंट नहीं

  • विपक्ष के नेता प्रवीण दरेकर का संजय राउत पर पलटवार
  • मनपा में किसकी सत्ता होगी, यह मुंबईकर तय करेंगे

पुणे. मुंबई मनपा (बीएमसी) पर वर्चस्व को लेकर शिवसेना प्रवक्ता सांसद संजय राउत के बयान पर पलटवार करते हुए विधान परिषद में विपक्ष के नेता प्रवीण दरेकर ने गुरुवार को पुणे में संवाददाताओं के साथ की गई बातचीत में कहा कि, मुंबई मनपा में किसकी सत्ता होगी, यह मुंबईकर तय करेंगे. वहां किसका भगवा लहराएगा, इसका किसी के पास पेटेंट थोड़े ही है. उन्होंने यह टिप्पणी भी की कि राउत ने अपना आत्मविश्वास गंवा दिया है. अब उनके बयान में पहले जैसा विश्वास नहीं रहा है.

स्नातकों को नौकरी के लिए सरकार को बाध्य करेंगे

विधान परिषद की पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीट से उम्मीदवारी न मिलने से भाजपा के स्थानीय नेताओं में नाराजगी का माहौल है. इससे जुड़े सवाल के जवाब में दरेकर ने कहा कि इस सीट के लिए महापौर मुरलीधर मोहोल, पूर्व विधायक मेधा कुलकर्णी, राजेश पांडे इच्छुक थे मगर टिकट न मिलने से कोई नाराज नहीं है. खासकर कुलकर्णी नाराज नाराज नहीं हैं, खुद भाजपा इसका ध्यान रख रही है. यह दावा करते हुए उन्होंने आज घोषणा की कि, भाजपा प्रत्याशी देशमुख के चुनाव जीतने के बाद भाजपा की ओर से स्नातकों को नौकरी दिलाने को लेकर सरकार को बाध्य किया जाएगा. स्नातक घटक को उद्योग क्षेत्र में प्रोत्साहन देने की बात भी उन्होंने की.

घटक दलों में तालमेल नहीं

राज्य सरकार के घटक दलों में कोई तालमेल नहीं है. कॉलेज बन्द हैं, परीक्षाएं नहीं हो रही है, मतदाताओं में सरकार की नीतियों को लेकर संभ्रम और गुस्सा है. राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए प्रवीण दरेकर ने कहा कि भाजपा द्वारा किये गए काम, पार्टी की नीतियों पर स्नातकों का यकीन है. संग्राम देशमुख ही उनकी पसंद की कसौटी पर खरे उतरेंगे. महाविकास आघाडी सरकार में मतभेदों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस दोनों मिलकर कांग्रेस की आर्थिक तटबंदी करने की कोशिश कर रहे हैं, यह बात कांग्रेस की समझ में नहीं आ रही. उल्टे उसके नेता शिवसेना और राष्ट्रवादी की साजिश को छिपा रहे हैं और सत्ता की कुर्सी से चिपके हुए हैं.

बिजली बिलों में रियायत ने देने पर नाराजगी

बिजली बिलों में कोई माफी या रियायत न देने संबन्धी ऊर्जा मंत्री नितिन राउत के बयान पर दरेकर ने सवाल उठाया कि अगर शिवसेना के मंत्री अनिल परब एसटी महामंडल के कर्मचारियों को बोनस और वेतन देने के लिए एक हजार करोड़ का पैकेज हासिल कर सकते हैं तो ऊर्जा मंत्री क्यों नहीं?