पुणे : 2410 में से सिर्फ 263 मोबाइल टॉवर्स वैध !

  • अवैध टॉवरों पर 1195 करोड़ का टैक्स बकाया

पुणे. शहर में विभिन्न कंपनियों द्वारा मोबाइल टॉवर्स (Mobile towers) बनाए गए हैं। उसके लिए महापालिका प्रशासन (Municipal administration) की अनुमति आवश्यक होती है। लेकिन कंपनी के मालिक अनुमति नहीं लेते हैं, ऐसा सामने आ रहा है। शहर में कुल 2410 टॉवर्स हैं। उसमें से सिर्फ 263 टॉवर्स वैध हैं। शेष सभी अवैध (Illegal) हैं। साथ ही ये लोग मनपा के टैक्स (TAX) का भी भुगतान नहीं करते हैं। इनके पास करीब 1195 करोड़ की राशि बकाया है। उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट के निर्देशानुसार महापालिका इन पर कोई कार्रवाई भी नहीं कर पा रही है। इससे महापालिका प्रशासन परेशान है।

सरकार ने राशि भरने के दिए थे निर्देश 

ज्ञात हो कि शहर में कुल 2410 मोबाइल टॉवर (Mobile towers)  हैं। इनसे महापालिका की ओर से कमर्शियल टैक्स वूसला जाता है, लेकिन ये लोग समय पर टैक्स नहीं भरते हैं। साथ ही इसमें से कई लोग तो मनपा के खिलाफ कोर्ट में भी गए हैं। इस वजह से मनपा को इन कंपनियों से टैक्स की बकाया राशि नहीं मिल पा रही है। टैक्स से संबंधित मसला हल करने के लिए राज्य सरकार की ओर से स्टेट टॉवर पॉलिसी (State tower policy) फरवरी 2018 में बनायी गयी है। इसके तहत टॉवर्स लगाने के लिए सरकार ने सहूलियत दी थी। इस वजह से अब तैपा एसोसिएशन द्वारा दावा किया था कि सरकार ने हमें सहूलियत देने से हम बकाया टैक्स का भुगतान नहीं करेंगे। इस तरह की मांग भी तैपा द्वारा राज्य सरकार से की गयी थी। इससे संबंधित एक पत्र भी उन्होंने सरकार को लिखा था। जिसका संज्ञान लेकर सरकार ने एक बैठक बुलाई थी।

राज्य के अतिरिक्त सचिव प्रवीण सिंह परदेशी ने यह बैठक बुलाई थी। इसमें एसोसिएशन द्वारा दावा किया था कि हम बकाया राशि नहीं भरेंगे। क्योंकि सरकार के पॉलिसी में उस तरह का प्रावधान किया गया है। इस पर महापालिका प्रशासन की ओर से दावा किया गया था कि सरकार ने यह पॉलिसी हाल ही में यानी फरवरी 2018 में बनायी है, इसमें बकाया राशि के लिए कोई छूट नहीं दी गयी है। इसलिए जो अब तक बकाया राशि है, वह इन टॉवर्स मालिकों को भरनी होगी। सरकार ने भी यह दावा मंजूर किया है। इससे अब तय हो रहा था कि टॉवर्स मालिकों को कोई राहत नहीं मिलेगी। ऐसा होने के बावजूद भी ये लोग टैक्स का भुगतान नहीं कर रहे हैं। बकाया राशि अब 1195 करोड़ तक जा पहुंची है।

मनपा नहीं कर पा रही कार्रवाई 

मोबाइल टॉवर्स की जानकारी विपक्षी नेता दीपाली धुमाल ने प्रशासन से पूछी थी। इस पर प्रशासन द्वारा खुलासा किया कि सिर्फ 263 टॉवर्स वैध हैं। इतने सारे टॉवर्स अवैध होने साथ ही टैक्स का भुगतान न करने के बावजूद भी महापालिका इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर पा रही है। क्योंकि हाई कोर्ट के निर्देश से मनपा के हाथ बंधे हुए हैं। कोर्ट के निर्देशानुसार महापालिका अवैध टावर्स पर कोई कार्रवाई न करे, साईट सील न करे, टॉवर्स की बिजली न काटे, काट दिया हो तो उसे जोड़ दें, नए टॉवर्स के प्रस्ताव को स्वीकारना होगा। इस तरह के निर्देश होने से महापालिका कोई कार्रवाई नहीं कर पा रही है। साथ ही ये लोग राज्य सरकार के निर्देश का भी पालन नहीं कर रहे हैं। 

टॉवर्स मालिकों ने जारी साल में 43 करोड़ टैक्स का भुगतान किया है। साथ ही अब तक कुल 350 करोड़ का भुगतान इन लोगों द्वारा किया गया है। फिर भी लगभग 1200 करोड़ राशि बकाया है। उन पर तीन गुना टैक्स का निर्धारण किया जाता है। साथ ही समय पर न भरने से दुगना दंड लगाया जाता है। यह राशि दंड की वजह से बढ़ती जा रही है। हाई कोर्ट के निर्देश के चलते हम कोई कार्रवाई नहीं कर पाते। इसको लेकर अब एक नीति बनाना आवश्यक है। इस पर प्रशासन का काम चल रहा है।

-विलास कानडे, टैक्स विभाग प्रमुख

टॉवर्स की बकाया राशि को लेकर हाई कोर्ट में मामला चल रहा है। टॉवर्स से मनपा को वसूली हो, इसके लिए हम कोर्ट में मनपा का पक्ष मजबूती से पेश करेंगे। उसके लिए विधि विभाग का हम फॉलो अप कर रहे हैं। सुनवाई के दरमियान स्थायी समिति अध्यक्ष भी उपस्थित रहेंगे।

– हेमंत रासने, अध्यक्ष, स्थायी समिति