corona

  • संक्रमण फैलने से डाक्टरों की बढ़ रही चुनौती
  • मृत्युदर भी बढ़ने की आशंका

पुणे. कोरोना के लक्षणों की अनदेखी करते हुए बुखार और खांसी जैसी शिकायतें होने पर लापरवाही बरते जाने से ही संक्रमण फैल रहा है. शरीर के ऑक्सीजन के लेवल में गिरावट होने और सांस लेने में तकलीफ होने के बाद ही लोग कोविड टेस्ट करा रहे हैं. 

समय पर टेस्ट न कराने से संबंधित व्यक्ति का शरीर पूरी तरह संक्रमण की गिरफ्त में चला जाता है और उसकी तबीयत गंभीर हो जाती है. ऐसे मरीजों का इलाज करना डाक्टरों के लिए एक चुनौती साबित हो रहा है. इससे मृत्यु दर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.

वायरस पूरी तरह से गया नहीं

पिछले कुछ दिनों में  कोरोना संक्रमण का असर कम हो गया था. शहर में कोरोना संक्रमितों की संख्या 100 से नीचे आ गई थी. कोरोना वायरस का प्रभाव भले ही कम हो गया हो, लेकिन यह वायरस पूरी तरह से नहीं गया है. इसी वजह से मनपा प्रशासन द्वारा नागरिकों को लगातार सावधानी बरतने व नियमों का पालन करने के निर्देश दिए जा रहे हैं. इसके बावजूद दिवाली पर नागरिकों ने खरीदारी और अन्य कार्यों के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों की पूरी तरह से धज्जियां उड़ा दी. इस वजह से पिछले कुछ दिनों से फिर एक बार संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है.

हल्का बुखार और सांस लेने में तकलीफ के मामले बढ़े

दिवाली पर्व के मद्देनजर नागरिक बड़ी संख्या में खरीदारी करने के लिए बाहर निकले और इसका असर दिवाली खत्म होने के बाद दिखाई दे रहा है. दीपावली के बाद कई नागरिकों में हल्का बुखार, ठंड लगने और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण देखे गये, लेकिन उन्होंने  इस पर ध्यान नहीं दिया. लक्षण रहने के बावजूद लोगों ने अपना कोविड टेस्ट नहीं कराया और इसके परिणामस्वरूप कुछ ही दिनों में संबंधित मरीजों के शरीर में वायरस पूरी तरह फैल गया. इसी वजह से इन रोगियों की हालत गंभीर हो गई. बुरी तरह से तबीयत बिगड़ने के बाद वे कोविड टेस्ट कराकर हास्पिटल में भर्ती हुए. अब वायरस पूरे शरीर में फैलने की वजह से डाक्टरों के सामने इन मरीजों को बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है. इन रोगियों में से कई वृद्ध हैं और कुछ मरीजों को अन्य बीमारियां हैं. इन वजहों से भी कोरोना से होने वाली मौतों का आंकड़ा इन दिनों बढ़ गया है. गंभीर रूप से बीमार मरीजों की संख्या बढ़ी है.

कुल मिलाकर यही बात ध्यान में आई कि कोरोना टेस्ट समय पर न कराने की वजह से इन मरीजों के फेफड़े (लंग्स) कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए हैं. इन मरीजों को बचाना चुनौतीपूर्ण है. हालांकि उचित और तुरंत इलाज करने से कई मरीजों की जान बचाने में कामयाबी मिली है, लेकिन कुछ रोगियों का र्सिफ देरी से इलाज शुरू होने से उन्हें जान गंवानी पड़ी. पिछले 8 दिनों में हास्पिटल में भर्ती होने वाले आम मरीजों की तुलना में गंभीर रूप से बीमार रोगियों की संख्या में वृद्धि हुई है.

-डा. संग्राम कपाले, सीईओ, जंबो कोविड सेंटर