PMC will promote the concept of Terrace Garden

    पुणे. टैरेस गार्डन (Terrace garden) में फूल के पौधों, साग-सब्जियों, फलों, और विभिन्न किस्मों की जड़ी-बूटियों की कई किस्मों को बिना मिट्टी के उगाया जाता हैं। सबसे अहम बात ये है कि इन पौधों को उगाने के लिए मिट्टी या किसी तरह के मिक्स का इस्तेमाल नहीं किया जाता हैं। पौधों के लिए कम्पोस्ट या खाद को तैयार किया जाता है। इस खाद को वो सूखे पत्ते, रसोई के कचरे और गोबर से तैयार किया जाता है। बिना मिट्टी की ये खाद पत्तों के कारण नमी अधिक देर तक बनी रहती है। इससे पौधे की सेहत अच्‍छी रहती है और केंचुए के लिए भी बढ़िया वातावरण तैयार होता है। 

    पुणे (Pune) की महिला ने इस संकल्पना को बनाया है। इससे अपने घर का कचरा वहां पर इस्तेमाल किया जाता है। इस वजह से पुणे महानगरपालिका (Pune Municipal Corporation) भी टैरेस गार्डन को बढ़ावा देगी। जनजागृति के लिए सम्बंधित महिला की मदद ली जाएगी। ऐसी जानकारी महानगरपालिका अतिरिक्त आयुक्त डॉ कुणाल खेमनार ने दी।  

     महापालिका कचरे से परेशान 

    ज्ञात हो कि पुणे महानगरपालिका कई सालों से कचरे की समस्या से परेशान है। इसको लेकर महानगरपालिका द्वारा विभिन्न उपाय योजनाए की जा रही है। लेकिन कचरे की समस्या का हल करने को लेकर महानगरपालिका को सफलता नहीं मिल रही है। प्रशासन द्वारा नए कचरा प्रकल्प बनाए जा रहे है। हाल ही में एकात्मिक घनकचरा प्रबंधन प्रणाली बनाई है। मोबाइल प्लांट भी बनाए जा रहे हैं। फिर भी समस्या बनी हुई है। अब पीएमसी (PMC) लोगों को अपना कचरा खुद ही नष्ट करने को लेकर बढ़ावा दे रही है। मनपा द्वारा आगामी काल में होटलों का कचरा नहीं उठाया जाएगा। उसके बाद अब महानगरपालिका आम लोगों को अपने घर में टैरेस गार्डन बनाने को लेकर बढ़ावा देगी। क्योंकि इसके लिए घर के कचरे का इस्तेमाल किया जा सकता है। पुणे की महिला ने इस तरह का प्रयोग किया है। उनके सहयोग से महानगरपालिका लोगों में जनजागृति करेगी।

    पुणे के महिला की संकल्पना  

    लोगों के घर व किचन में कचरा उत्पन्न होता है और लोगों को नहीं पता होता है कि इसके बारे में क्या करना है। यही सवाल नीला रेनाविकर के मन में था। इसलिए उन्होंने अपने अपार्टमेंट में उन दोस्तों से संपर्क किया जो खाद बनाने का अभ्यास कर रहे थे। उनसे सीखा कि घरेलू कचरे को कैसे अलग किया जाए और खाद तैयार करना शुरू किया। इसके बाद नीला ने इंटरनेट से मिट्टी रहित बागवानी की मूल बातें सीखीं। उन्होंने यह समझने के लिए कई वीडियो देखे कि कैसे एक पौधे के लिए निर्माण किया जाए, कैसे मिट्टी के पौधों को पानी दिया जाए और किस तरह के उर्वरकों का उपयोग किया जाए। फिर वह खाद तैयार करने के लिए आगे बढ़ी। इसके लिए, उसने सूखी पत्तियों को इकट्ठा किया और उन्हें एक खाद बिन में डाल दिया। उसने पुणे में एक स्थानीय खेत से ताजा गाय का गोबर खरीदा और यह स्टार्टर बन गया जिसे उसने सूखे पत्तों में मिलाया। इस कम्पोस्ट को उन्होंने एक बालटी में डाला और उसमें खीरे के बीज लगाए, उसे नियमित रूप से पानी देती रहीं और 40 दिन बाद उसमें दो खीरे उगे। इस छोटी सी जीत के बाद उन्होंने उन्होंने मिर्च, टमाटर और आलू भी उगाये। 

    बिना मिट्टी की खेती के तीन प्रमुख लाभ

    Soilless Gardening (बिना मिट्टी की खेती) के तीन प्रमुख लाभ हैं। एक तो कीड़े नहीं लगते, दूसरा वीड या फालतू घास नहीं होती, तीसरा मिट्टी वाली खेती में पौधे पोषण और पानी ढूंढते हैं जो यहां आसानी से मिल जाता है। यह बदले में कीटनाशकों और उर्वरकों की आवश्यकता को कम करता है। पारंपरिक मिट्टी आधारित खेती में एक पौधा अपनी अधिकांश ऊर्जा पानी और पोषण की तलाश में जड़ प्रणाली का विस्तार करता है। लेकिन, मिट्टी रहित खेती में ये सभी सीधे जड़ों में उपलब्ध हैं। 

    इस महिला की सहयोग से पुणे शहर में टैरेस गार्डन की संकल्पना को लेकर जनजागृति की जायगी। ताकि लोग अपने घर का कचरा घर में नष्ट करें। इससे महानगरपालिका पर भी कचरे का ज्यादा बोझ नहीं आएगा। सभी माध्यमों से हम लोगों से जुड़कर उसे आगे ले जाने का प्रयास करेंगे।

    -डॉ कुणाल खेमनार, अतिरिक्त आयुक्त, पुणे महानगरपालिका