पीएमपी की बसों को नहीं मिल रहे यात्री, एक बस की आय सिर्फ 2 हजार रुपए

पिंपरी. पीएमपीएमएल द्वारा पिंपरी-चिंचवड़ शहर में भले ही बस सेवा शुरू की गई हो, लेकिन उसे यात्रियों से बेहद कम रिस्पॉन्स मिल रहा है. इसके परिणाम स्वरूप पीएमपीएमएल को हर बस के पीछे औसत 8 हजार रुपये का घाटा सहना पड़ रहा है.

पहले हर रोज 9 से 10 हजार रुपये की आय पाने वाली पीएमपी की आय अब औसत दो हजार रुपये तक सिमट गई है. इस वजह से पहले ही घाटे में चल रही पीएमपीएमएल के पहिए नुकसान की गहराई में और धंसने की तस्वीर उभरी है.

26 मई से शुरू की गई बस सेवा

लॉकडाउन में कुछ हद तक ढील दिए जाने के बाद, मनपा आयुक्त श्रवण हर्डिकर की पहल पर पीएमपीएमएल की बस सेवा 26 मई से शुरू हुई. कोरोना संक्रमण के मद्देनजर बस में 10 वर्ष से कम आयु के बच्चों और 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को बस से यात्रा करने की अनुमति नहीं थी. इसके अलावा, बस में उसकी कुल क्षमता के 50 प्रतिशत यात्री यानी केवल 21 लोग ही सफर कर सकते थे. सरकारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क पहनना, सैनिटाइजिंग आदि पर अमल के साथ विभिन्न रूट्स पर बसें दौड़ने लगीं, लेकिन यात्रियों ने इन बसों में यात्रा करने से मुंह मोड़ लिया. कई बसें तो विभिन्न रूट्स पर खाली दौड़ रही थीं.

प्रति बस हो रहा 8 हजार का घाटा

इस बीच पीएमपीएमएल प्रबंधन ने शहर में चल रही इन बसों की औसत इन्कम की जानकारी ली. एक जून से सात जून के बीच शहर के 30 रूट्स पर हर रोज़ 80 बसें चलाई गईं. इन बसों ने हर दिन 21 हजार 39 किलोमीटर का सफर किया. इसके जरिए बसों को हर रोज औसत 1 लाख 85 हजार रुपये की इन्कम मिली. यानी हर बस को औसत 2 हजार रुपये इन्कम होने की बात सामने आई. पहले 9 से 10 हजार इन्कम मिलती थी, लेकिन अब हर बस के पीछे 8 हजार रुपये का नुकसान हो रहा है.

बरकरार है कोरोना का दहशत

इस संबंध में पीएमपी के ट्रैफिक प्रबंधक अनंत वाघमारे ने बताया कि वर्तमान में स्कूल और कॉलेज बंद हैं. इसके अलावा अन्य राज्यों के कर्मचारी भी शहर में नहीं हैं. इसी वजह से यात्रियों की संख्या में कमी आने का अनुमान है. हालांकि, जब स्कूल और कॉलेज बंद थे, तब भी प्रति बस इतनी कम इन्कम नहीं थी. ऐसे में यह लगता है कि लोगों के मन में कोरोना संक्रमण का डर है और इसी वजह से वे सार्वजनिक परिवहन का उपयोग नहीं कर रहे हैं. पीएमपीएमएल को यात्रियों के रिस्पॉन्स के अभाव में भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है.