PMP DEPO

    पुणे. पीएमपी को शहर की जीवनरेखा कहा जाता है, लेकिन इसकी हालत कई सालों सें सुधर नहीं पा रही है। उल्टा दिन-ब- दिन खस्ता ही हो रही है। हर साल पीएमपी (PMP) को घाटे से निकालने के लिए पुणे (Pune) और पिंपरी महानगरपालिका (Pimpri Municipal Corporation) को सहायता करनी पड़ती है। पीएमपी खुद सुधरने का नाम नहीं ले रही है। महानगरपालिका की ऑडिट से जानकारी सामने आ रही है कि पीएमपी के बेडे में कुल 2 हजार 126 बसें हैं। उसमें से करीब 706 बसें 7 साल पुरानी हैं। 

    ऐसी बसों पर मरम्मत ज्यादा करनी पड़ती है। साथ ही ये बसें सड़कों पर बंद होती है। मनपा का कहना है कि इससे पीएमपी का घाटा बढ़ता ही जा रहा है। अपनी यह हालात सुधारने के लिए पीएमपी ने अपने 30 डिपो का विकास करने का मन बना लिया है। इसके माध्यम से पीएमपी को सालाना करीब 1500 करोड़ की आय मिलेगी। विभिन्न मॉडल के तहत विकसन किया जाएगा। इससे सम्बंधित प्रस्ताव पीएमपी द्वारा मंजूरी के लिए संचालक मंडल के समक्ष रखा है। ऐसी जानकारी पीएमपी के सीएमडी डॉ. राजेंद्र जगताप (CMD Dr. Rajendra Jagtap) ने दी।

     पीएमपी के बेड़े में कुल 2 हजार 126 बसें

    ज्ञात हो कि पीएमपी द्वारा किराए पर साथ ही खुद की, ऐसे बसों का इस्तेमाल किया जाता है। दोनो मिलकर पीएमपी के पास कुल 2 हजार 126 बसें हैं। उसमें से 1 हजार 383 बसें रोड़ पर दौड़ाई जाती है। यानी कुल 743 बसें वैसे ही पड़ी हुई है। पीएमपी के कारोबार की वजह से पीएमपी सुधर नहीं पा रही है। एक तो बसें सड़कों पर नहीं आ रही है। साथ ही जो बसें पीएमपी के बेडे में हैं, उसमें से करीब 44 प्रतिशत बसें 7 साल से भी पुरानी है। एक बस की अवधि ज्यादा से ज्यादा 7 साल की होती है। ऐसा होने के बावजूद भी पीएमपी प्रशासन के पास लगभग 44 प्रतिशत बसें पुरानी है। ये बसें एक तो सड़कों पर बंद पड़ती है। साथ ही इन पर बार-बार मरम्मत करने की वजह से पीएमपी का निधि भी खर्च हो रहा है। नतीजा पीएमपी का घाटा बढ़ता जा रहा है। इसके साथ ही एक भी रोड़ से पर्याप्त नफा ना मिलना, मरम्मत पर ही ज्यादा खर्चा होना, कर्मियों के वेतन आदि कारणों से पीएमपी का घाटा बढ़ता ही जा रहा है। दोनों मनपाओ द्वारा पीएमपी को मदद लेनी पड़ती है। इस वजह से पीएमपी ने इस घाटे से उबरने के लिए एक तरकीब निकाली है। पीएमपी ने 30 डिपो का विकास करने का फैसला लिया है।

    11 हजार करोड़ का आएगा खर्चा

    इस बारे में डॉ. राजेंद्र जगताप ने कहा कि डिपो का विकास करने से पीएमपी के घाटे की समस्या हल होगी व पीएमपी को आय का एक नया स्त्रोत मिल जाएगा। इन डिपो में से ज्यादा तर डिपो मध्यवर्ती इलाके के है। डिपो में कई मंजिल की इमारते बनाई जाएगी। इसमें से नीचे की जगह पीएमपी का संचलन, पार्किंग आदि के लिए किया जाएगा। तो ऊपर के हिस्से कमर्शियल के तौर पर किराए पर दिए जाएंगे। 30 साल का उसके लिए करार किया जाएगा। इसमें आईटी कम्पनी से लेकर अस्पतालों का भी समावेश होगा। डॉ. जगताप के अनुसार, सरकार के नए डीसी रूल के अनुसार मध्यवर्ती इलाके एफएसआय भी ज्यादा मिलेगा। इससे पीएमपी को सालाना 1500 करोड़ तक की आय मिल जाएगी। सभी डिपो का विकास करने के लिए पीएमपी को करीब 11 हजार करोड़ की लागत आएगी। जगताप ने आगे कहा कि इसमें विभिन्न मॉडल हमने सुझाए हैं। इसमें बीओटी, पीपीपी, वैश्विक बैंक से कर्ज लेना, ऐसे मॉडल्स का समावेश हैं। हमने यह प्रस्ताव संचालक मंडल के समक्ष रखा है।

    इन 30 डिपो का होगा समावेश

    औंध, बानेर, बालेवाड़ी, भेकराई नगर, हडपसर, कात्रज, कोथरुड, कोथरुड कुम्बरे पार्क, कोथरूड मुंबई-बेंगलुरू हाइ वे, पुणे स्टेशन, नता वाड़ी, मार्केटयार्ड, सुतारवाड़ी, स्वारगेट, स्वारगेट सेन्ट्रल वर्कशॉप, अप्पर इंदिरानगर, वाघोली, शेवालेवाडी, भोसरी, भोसरी गव्हाणे बस्ती, भोसरी सुविधा केंद्र, चरोली, डूडलगांव, मोशी, निगडी, भक्ति शक्ति चौक, रावेत, शिन्देवाडी, हिंजेवडी, पिम्परी।

     प्रमुख साइड क्षेत्र

    • कुल साइट क्षेत्र – 100 एकड़
    • कुल पट्टे पर देने योग्य क्षेत्र – 2.5 करोड़ वर्ग फुट
    • कुल पीएमपीएमएल कार्यालय+कार्यशाला क्षमता – 10 लाख वर्गफुट
    • पार्किंग और पीएमपीएमएल सुविधाओं सहित कुल निर्मित क्षेत्र  3.5 करोड़ वर्गफुट
    •  चालान/प्रीमियम आदि सहित कुल परियोजना निर्माण लागत  11666 करोड़

     कुल वार्षिक किराया राजस्व  – 1516 करोड़ रुपये

    30 साल की अवधि के लिए

    सालाना 500 करोड़ से ज्यादा  राजस्व दे सकते हैं।

    पीएमपी का घाटा बढ़ता ही जा रहा है। अपनी हालत को सुधारने के लिए पीएमपी ने अपने 30 डिपो का विकास करने का मन बना लिया है। इसके माध्यम से पीएमपी को सालाना करीब 1500 करोड़ की आय होगी। विभिन्न मॉडल के तहत विकसन किया जाएगा। इससे सम्बंधित प्रस्ताव पीएमपी द्वारा मंजूरी के लिए संचालक मंडल के समक्ष रखा है।

    -डॉ. राजेंद्र जगताप, सीएमडी, पीएमपी