property tax

  • भाजपा और राष्ट्रवादी कांग्रेस में श्रेय की होड़
  • राज्य सरकार नहीं दे रही मंजूरी

पिंपरी. महामारी  कोरोना के संकटकाल में आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे पिंपरी चिंचवड़ के रहिवासियों को राहत देने के लिए मनपा के सत्तादल भाजपा ने मार्च 2020 से छह महीने तक का प्रापर्टी टैक्स (Property Tax) माफ करने की घोषणा की। आम सभा ने इसका प्रस्ताव पारित कर उसे अंतिम मंजूरी के लिए राज्य सरकार के पास भेज दिया। हालांकि उसके बाद से यह प्रस्ताव अब तक अधर में ही लटका हुआ है। इसके लिए भाजपा और राष्ट्रवादी कांग्रेस की श्रेयवाद की लड़ाई को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। नतीजन टैक्स माफी की घोषणा हवाई साबित हुई है।

छह माह का प्रॉपर्टी टैक्स का प्रस्ताव आमसभा में पास

पिंपरी चिंचवड़ की उद्योगनगरी को श्रमिकों की नगरी कहा जाता है। यहां बड़ी तादाद में श्रमिक रहते हैं। कोरोना महामारी व लॉकडाउन की वजह से उद्योग क्षेत्र सहित सभी क्षेत्रों को जोरदार झटका लगा है। सभी भारी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। ऐसे में शहरवासियों को राहत देने के लिहाज से शहर की सभी रिहाइशी और गैर रिहाइशी संपत्तियों का छह माह तक का प्रॉपर्टी टैक्स माफ करने का फैसला किया गया।

पिंपरी चिंचवड़ शहर में लगभग साढ़े पांच लाख संपत्तियां हैं। उनका छह महीने का प्रॉपर्टी टैक्स माफ करने पर मनपा को बड़ा आर्थिक झटका लगेगा। इसके बावजूद भाजपा सहित अन्य दलों के नेताओं ने मनपा आयुक्त श्रवण हर्डिकर से टैक्स माफी की मांग की। साथ ही आम सभा में इसका प्रस्ताव भी पारित किया गया।

राज्य सरकार कर रही लेटलतीफी

इसका प्रस्ताव राज्य सरकार के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेजा गया, लेकिन सरकार ने इस पर अब तक कोई फैसला नहीं किया है। मनपा में भाजपा की सत्ता है और राज्य में शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस व कांग्रेस गठबंधन की महाविकास आघाड़ी सरकार है। इस प्रस्ताव को सरकार से अंतिम मंजूरी मिलना जरूरी है।

अगर इसे मंजूरी मिलती है तो श्रेय भाजपा को मिलेगा, यह डर राष्ट्रवादी को सता रहा है। अगर मंजूरी नहीं मिलती है तो इसका ठीकरा राष्ट्रवादी पर ही फोड़ा जाएगा, इससे राष्ट्रवादी कश्मकश में है। वहीं राष्ट्रवादी की दुविधा का लाभ ले रही भाजपा को चिंता आगामी मनपा चुनाव की है। पूर्ण बहुमत की सत्ता के बावजूद आमजनों को राहत न दे सकने की कीमत उसे भी चुकानी होगी, इसका एहसास भाजपा को भी है।सत्तादल और विपक्ष के श्रेय की इस होड़ के चलते शहर के आमजनों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।