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    पुणे. राज्य सरकार (State Government) ने जल्दबाजी में 23 गांवों (Villages) को नगर निगम (Municipal Corporation) में शामिल करने का फैसला किया है। इन गांवों के विकास के लिए एक भी रुपया नहीं दिया है। इसलिए उन सभी 23 गांवों के विकास (Development) के लिए 9,000 करोड़ रुपये मुहैया कराए जाएं। साथ ही विकास योजना तैयार करते समय ग्रामीण के साथ अन्याय न करें। ऐसी भूमिका भाजपा प्रदेश अध्यक्ष (BJP State President) चंद्रकांत पाटिल द्वारा प्रस्तुत की गई। उन्होंने यह भी मांग की, इन सभी 23 गाँवो में विकास कार्यो की टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, उसका काम तत्काल हो।  

    ग्रामीणों के साथ किया संवाद

     भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने ग्रामीणों से बातचीत की और उनकी आशाओं, अपेक्षाओं और कठिनाइयों के बारे में जाना। इसके बाद उन्होंने पत्रकारों से बात की। पाटिल ने कहा कि राज्य में महाविकास अघाड़ी सरकार ने 23 गांवों को पुणे नगर निगम में शामिल करने का फैसला किया है।   पहले इसमें 11 गाँव शामिल थे। उस गांव की डीपीआर अभी पता नहीं चल पाई है।  इनके विकास के लिए फंडिंग का कोई पता नहीं है। उनसे पहले जो  गाँव शामिल थे, उनका भी विकास नहीं हुआ है। तो सरकार 23 नए गाँवो को शामिल करने पर क्यों जोर दे रही है? यह जानने का कोई उपाय नहीं है। हालांकि, इन गांवों के शामिल होने के बाद मुख्य रूप से इन गाँवो को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से स्वीकृत राशि को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसके अलावा, यदि राष्ट्रीय पेयजल जैसी योजना के माध्यम से गाँवो को धनराशि स्वीकृत की गई है, तो इसका क्या?  इसलिए जिन कार्यों को मंजूरी दी गई है, उसे टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही सभी कार्यों को पूरा करना होगा।

    विकास में जल्दबाजी ना हो

    उन्होंने आगे कहा कि 23 नये शामिल किये गये गाँवो की विकास योजना में किसी भी तरह की जल्दबाजी नहीं की जाये। साथ ही अगर गाँवो को पुणे नगर निगम में शामिल करना है तो उसकी विकास योजना तैयार करने की जिम्मेदारी भी नगर निगम को दी जानी चाहिए। शहरी विकास या पीएमआरडीए में कोई हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। जनसंख्या और भौगोलिक क्षेत्र को देखते हुए, नए गाँवो को शामिल करने का निर्णय अन्यायपूर्ण है। गाँवो को शामिल करने की राज्य सरकार की मंशा पर सवाल पेश करते हुए पाटिल ने कहा कि जितने छोटे राज्य होंगे, प्रशासन चलाना उतना ही आसान होगा, इस पर अटलजी ने जोर दिया था। इसके कारण उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों का विभाजन नए राज्यों में हुआ।  इसलिए बेहतर प्रशासन के लिए छोटे राज्यों या निगमों का होना सुविधाजनक होगा। हालांकि, उन्होंने यह भी मांग की है कि राज्य सरकार सरकार द्वारा शामिल गाँवो के विकास के लिए 9,000 करोड़ रुपये प्रदान करे।