मनपा कमिश्नर के ‘अभिप्राय’ को लेकर सभागृह नेता की केबिन में ‘राडा’

  • जोरदार कहासुनी, केबिन के दरवाजे पर भी फूटा गुस्सा

पिंपरी. शिवसेना गुटनेता के वाकड-ताथवड़े प्रभाग के ताथवड़े में 51 करोड़ रुपए की लागतवाली सड़क विकास की योजनाओं को लेकर जारी सियासी रणसंग्राम थमने का नाम नहीं ले रहा है. बुधवार को इसी मुद्दे पर सभागृह नेता नामदेव ढाके की केबिन के ‘एंटी चेंबर’ में खासा ‘राडा’ हुआ.राज्य सरकार ने मनपा कमिश्नर श्रावण हार्डिकर के अभिप्राय पर इन योजनाओं से जुड़े प्रस्ताव को खारिज करने के स्थायी समिति के फैसले को निलंबित कर दिया है.

कमिश्नर ने अपने अभिप्राय में सड़क विकास योजनाओं को लेकर अनुकूलता दर्शाई है.उसी अभिप्राय को लेकर आज भाजपा के एक स्वीकृत नगरसेवक और एक पूर्व नगरसेवक ने सभागृह नेता की केबिन में हंगामा मचाया.

क्या है पूरी घटना

इस हंगामे के बारे में पूछने पर सभागृह नेता नामदेव ढाके ने ऐसी कोई घटना घटने से इंकार किया. हालांकि सभागृह नेता के नाते मनपा कमिश्नर और प्रशासन पर कोई नियंत्रण नहीं है, यह शिकायत करते हुए पूर्व नगरसेवक राजू दुर्गे और स्वीकृत नगरसेवक मोरेश्वर शेडगे ने ढाके से जवाब मांगा. उनका आरोप है कि पदाधिकारियों की निष्क्रियता से शहर में भाजपा की बदनामी हो रही है.यहां तक कि उन्होंने ढाके से नियंत्रण न रख पाने की सूरत में पद से इस्तीफा देने तक की मांग की.इस मुद्दे पर तीनों के बीच काफी कहासुनी हुई.दोनों नेता गुस्से में केबिन का दरवाजा पटकते हुए बाहर निकले. ढाके ने ऐसा कुछ होने की बात से इंकार किया. वहीं दुर्गे ने इस खबर की पुष्टि करते हुए कहा कि वहां कोई हंगामा नहीं किया गया, बल्कि हमारे बीच कुछ कहासुनी जरूर हुई है. सत्तादल के नाते कमिश्नर और प्रशासन पर पदाधिकारियों का नियंत्रण रहना चाहिए. अन्यथा बेवजह पार्टी की बदनामी होती है औऱ पार्टी की प्रतिमा मलिन होती है.

सत्तारूढ़ भाजपा का इन प्रस्तावों का विरोध

26 अगस्त को मनपा कमिश्नर श्रवण हार्डिकर ने प्रभाग नंबर 25 में ताथवड़े के जीवननगर से मुम्बई-बैंगलोर हाईवे तक 24 मीटर चौड़ी सड़क के विकास के लिए 20 करोड़ 33 लाख और जरूरत के अनुसार कांक्रीटीकरण के लिए 30 करोड़ 69 लाख रुपए ख़र्च दो प्रस्ताव स्थायी समिति के समक्ष मान्यता के लिए पेश किए थे.मनपा में सत्तारूढ़ भाजपा द्वारा इन प्रस्तावों का विरोध किया गया था.स्थायी समिति की बैठक में दोनों प्रस्तावों को बिना कोई ठोस कारण बताए खारिज कर दिया था.जबकि इसी तरह का कांक्रीटीकरण का प्रस्ताव वार्ड नंबर 29 पिंपलगुरव में मंजूर किया गया है.इसके खिलाफ शिवसेना के गुटनेता राहुल कलाटे ने राज्य के नगर विकास विभाग से शिकायत की.इसे संज्ञान में लेकर नगरविकास विभाग ने मनपा कमिश्नर श्रवण हार्डिकर से राय मांगी.

क्या है वजह

मनपा कमिश्नर ने राज्य सरकार को भेजे अपने अभिप्राय में कहा कि वाकड में बड़ी संख्या में हाउसिंग सोसायटियां बन रही हैं.वाकड क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है.भविष्य में यातायात की भीड़ को देखते हुए इन सड़कों को विकसित करने की आवश्यकता है. इस प्रभाग से प्रॉपर्टी टैक्स से सर्वाधिक आय मिलती है ऐसे में वहां बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराना जरूरी है.इस अभिप्राय पर राज्य सरकार ने स्थायी समिति द्वारा बिना किसी कारण के खारिज किए गए सड़क विकास प्रस्तावों को निलंबित कर दिया.इसके बाद से सत्तादल भाजपा में घमासान मचा हुआ है. मनपा कमिश्नर के अभिप्राय पर वरिष्ठ विधायक लक्ष्मण जगताप के खेमे में कड़ी नाराजगी है. असल में शिवसेना गुटनेता राहुल कलाटे ने जगताप को विधानसभा चुनाव में कड़ी चुनौती दी थी, तब से उनके बीच सियासी रंजिश शुरू है. कलाटे के वाकड, ताथवडे, पुनावले प्रभाग क्रमांक-25 में सड़क विकास के करीबन 75 करोड़ और स्कूल इमारत के निर्माण के 24 करोड़ कुल 100 करोड़ रुपए के प्रस्ताव को स्थायी समिति की बैठक में जगताप गुट के नगरसेवकों ने विरोध जताया था. सड़क विकास के प्रस्ताव पर मतदान हुआ जिसमें भाजपा के दूसरे विधायक और शहराध्यक्ष महेश लांडगे के समर्थक नगरसेवकों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था. इसके जरिए 2 प्रस्ताव मंजूर कराने में कलाटे ने सफलता पायी. इस पर आगबबूला हुए जगताप समर्थकों ने अन्य 2 प्रस्ताव खारिज कर कलाटे को मात दी थी.अब राज्य सरकार के फैसले से जगताप गुट को करारी मात मिली है.