rajesh bagwe

    पुणे. पुणे महानगरपालिका शिक्षा विभाग (Pune Municipal Corporation Education Department) की ओर से 2012 साल में सहायक शिक्षा प्रमुखों के लिए भर्ती प्रक्रिया की गई थी, लेकिन तत्कालीन अधिकारी ने नियम की धज्जियां उड़ाकर यह भर्ती की थी। ऐसा आरोप कांग्रेस (Congress) के नगरसेवक अविनाश बागवे (Corporator Avinash Bagwe) ने लगाया है। साथ ही उन्होंने मांग की है कि भर्ती प्रक्रिया रद्द (Cancel) कर महानगरपालिका का हुआ नुकसान सम्बंधित अधिकारियों से वसूले। इसको लेकर बागवे ने कमिश्नर (Commissioner) को पत्र (Letter) लिखा है।

    बागवे के अनुसार, शिक्षा विभाग प्राथमिक ने  03/08/2011 13 को सहायक शिक्षा प्रमुख के रिक्तियों को भरने के लिए विज्ञापन जारी किया था। इस विज्ञापन में महिला आरक्षण, खिलाड़ी आरक्षण का उल्लेख नहीं था। चूंकि सरकार द्वारा भर्ती को मंजूरी नहीं दी गई थी, इसलिए मनपा कमिश्नर इस भर्ती का विरोध कर रहे थे। इस बारे में पूर्व शिक्षा प्रमुख  रामचंद्र जाधव को पत्र द्वारा सूचित किया गया था। कमिश्नर ने स्पष्ट रूप से कहा था कि ऐसे पदों को नहीं भरा जाना चाहिए। एक के अनुसार, वेतन के लिए फंड नहीं दिया जाएगा। रामचंद्र जाधव को लिखित रूप से सूचित किया गया था।   शिक्षा प्रमुख रामचंद्र जाधव स्पष्ट करते हैं कि ये पद पूरी तरह से अस्थायी हैं।  “प्वाइंट नॉमिनेशन” और “स्केल पे” लागू नहीं होते हैं क्योंकि नियुक्तियां दैनिक आधार और मानदेय के आधार पर की जानी हैं।  इसके बावजूद रामचंद्र जाधव द्वारा सभी नियमों और विनियमों का पालन ना करते हुए कमिश्नर द्वारा दिए गए आदेशों की अवहेलना करके भर्ती की गई थी। परिणामस्वरूप, पुणे मनपा भारी वित्तीय नुकसान उठा रहा है।

    मनपा का 12 करोड़ का नुकसान

    बागवे ने आगे कहा कि अब तक, महानगरपालिका ने लगभग 12 करोड़ रुपए का वेतन दिया है। सरकार ने भी अवैध घोषित करके भर्ती को कम करने का फैसला 13 जून 2012 को लिया गया। बाद में अदालत ने राज्य सरकार को 6 सप्ताह के भीतर निर्णय लेने के लिए कहा था। अदालत ने यह भी अनुमति दी थी कि यदि नियुक्ति मनपा या सरकार द्वारा रद्द की जाए। बागवे ने कहा कि यह सब कृत्रिम और अवैध भर्ती का एक रूप है। जिसका बोझ  पीएमसी के खजाने पर पड़ रहा है। मैं इस अवैध भर्ती को रद्द करने और पुणे मनपा के विकल्प के रूप में पुणे के नागरिकों को वित्तीय नुकसान को रोकने का अनुरोध करता हूं। मनपा  द्वारा अब तक की गई वित्तीय हानि को संबंधित अधिकारी से वसूल किया जाना चाहिए।