Ambil Odha

    पुणे.  पुणे महानगरपालिका (Pune Municipal Corporation) की ओर से हाल ही सर्वे नंबर 135, प्लॉट नंबर 28 संभाग संख्या 05 अम्बिल ओढ़ा (Ambil Odha) में मकानों पर अवैध कार्रवाई की गयी।  नागरिकों को बिना नोटिस (Notice) दिए स्थानांतरित किया गया। सिर्फ बिल्डर केदार एसोसिएट्स द्वारा निवासियों को दिए गए अनधिकृत पत्र का इस्तेमाल किया गया। जिसमें बड़ी मात्रा में भीड़ जमा हुई थी। 

    कोरोना को लेकर लागू किए गए कानून के अनुसार महानगरपालिका कमिश्नर और झोपड़पट्टी निर्मूलन के सीईओ पर मामला दर्ज होना चाहिए। ऐसी मांग पं. नेहरू ब्लॉक कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन आड़ेकर द्वारा पुलिस उपायुक्त से की गई है। उन्हें एक ज्ञापन भी सौंपा है। 

     कोर्ट के निर्देश को भी नहीं माना 

    आड़ेकर ने कहा कि  मुख्य बात यह  है कि उच्च न्यायालय ने 09 जुलाई 2021 तक  यह सुनिश्चित करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए कि नागरिक किसी भी तरह से जमीन पर सड़क पर इकट्ठा न हों।  ऐसा न करने का आदेश होने पर भी नगर कमिश्नर और  सीईओ द्वारा कोरोना की कालावधि मकानों  पर अवैध कार्रवाई की।  महामारी के समय में इस तरह की कार्रवाई करना सामाजिक रूप से वैध नहीं था।  विचलित करने की सोचे बिना यह कार्रवाई की गई। कोरोना  के लिए खतरनाक है।  आड़ेकर ने कहा कि शहर में रहते हुए कमिश्नर और  सीईओ ने  ऑपरेशन के दौरान कोरोना पर ध्यान नहीं दिया गया। कमिश्नर और  सीईओ के खिलाफ अपराध  दायर किया जाना चाहिए।  यदि  दोनों अधिकारियों के विरुद्ध कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है, तो हमें कोर्ट में जाना होगा। 

     हाल ही में हुई थी कार्रवाई 

    अंबिल ओढ़ा कात्रज झील से शुरू होता है। अंबिल ओधा क्षेत्र में एक स्लम पुनर्वास परियोजना की घोषणा की गई है। इसके मुताबिक नागरिकों का आरोप है कि पुणे नगर निगम ने नदी के प्राकृतिक बहाव को बदलने की योजना बनाई है।  साइट बिल्डर के गले में डालने का दावा करते हुए नागरिकों ने विरोध किया था। विध्वंस शुरू होने के बाद से अंबिल ओढ़ा के विरोध ने तनाव पैदा कर दिया था। कुछ लोगों ने शरीर पर केरोसिन डालकर आग लगाने का प्रयास किया। अंबिल धारा में पुलिस की एक बड़ी टुकड़ी को तैनात किया गया था। अंबिल धारा को जोड़कर कई जगहों पर निर्माण कार्य किया गया है।  नतीजा यह है कि बरसात के दिनों में कई बार पानी आसपास की बस्तियों में घुस जाता है और नुकसान पहुंचाता है।  प्रशासन बार-बार नालों में पानी भर रहा है, प्राकृतिक जल ढोने वाली धाराओं में पानी भर रहा है। परिणामस्वरूप, अम्बिल धारा की वहन क्षमता 60 प्रतिशत तक कम हो गई है। इस वजह से प्रशासन ने वहां से नागरिकों को हटाने को लेकर नोटिसें दी थी।