रूपी बैंक के विलय का निर्णय रिजर्व बैंक लेगा

  • किसी भी बैंक से विलय का प्रस्ताव नहीं

पुणे. रूपी बैंक (Rupee bank) के विलय का निर्णय (Decision) रिजर्व बैंक (reserve Bank) के अधिकार क्षेत्र में है. किसी भी बैंक से विलय (merger) का प्रस्ताव अब तक प्रशासकों को नहीं भेजा गया है. इसके चलते उसे खारिज करने का सवाल ही पैदा नहीं होता. यह स्पष्टीकरण रूपी बैंक के प्रशासकों ने दिया है.

डिपॉजिटर्स  ने हाईकोर्ट में पेश की याचिका

ज्ञात हो कि रूपी बैंक के कुछ डिपॉजिटर्स (Depositors) ने पत्रकार-वार्ता में आरोप लगाया था कि बैंक के प्रशासक निवेशकों को विश्वास में लिए बिना ही निर्णय ले रहे है. उक्त आरोप को लेकर प्रशासक सीए सुधीर पंडित ने विज्ञप्ति के जरिए यह स्पष्टीकरण दिया है. विज्ञप्ति में कहा गया है कि रिज़र्व बैंक के आदेशानुसार रूपी बैंक और महाराष्ट्र राज्य को-ऑपरेटिव बैंक के बीच विलय का संशोधित प्रस्ताव भी पेश किया गया है. उसका भविष्य नाबार्ड और रिज़र्व बैंक की मंजूरी पर निर्भर है. बैंक के कुछ डिपॉजिटर्स ने हाईकोर्ट ((High Court) में याचिका पेश की है. मीडिया को इसकी जानकारी देने के दौरान संबंधित डिपॉजिटर्स ने वास्तविकता की उपेक्षा की है. 

संयुक्त प्रस्ताव रिज़र्व बैंक को भेजा गया 

रूपी बैंक ने विभिन्न बैंकों को विलय का प्रस्ताव भेजा था. कुछ बैंकों ने सहमति भी दशाई है, मगर उसे क्रियान्वित नहीं किया जा सका. रिज़र्व बैंक के आदेशानुसार रूपी बैंक और महाराष्ट्र राज्य को-ऑपरेटिव बैंक के विलय का संयुक्त प्रस्ताव रिज़र्व बैंक को भेजा गया है. विलय का संशोधित प्रस्ताव सहकारिता आयुक्त कार्यालय द्वारा रिज़र्व बैंक और नाबार्ड को नवंबर के अंतिम सप्ताह में पेश किया गया है. इसके चलते विलय के प्रस्ताव का भविष्य एवं स्वरूप नाबार्ड एवं रिज़र्व बैंक की मंजूरी पर निर्भर है.

जमाकर्ता फैला रहे भ्रम

रूपी बैंक के प्रशासक ने स्पष्ट किया है कि बैंक के विलय को लेकर कुछ बैंकों को प्रस्ताव भेजे गए हैं और उनके लिए प्रयास किए जा रहे हैं. मगर कुछ डिपॉजिटर्स गलत जानकारी देकर अन्य लोगों को भ्रमित कर रह है. यदि इन डिपॉजिटर्स ने किसी बैंक के साथ चर्चा की हो, तो उसके कागजात पेश करें.