प्रतीकात्मक तस्वीर
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    पुणे. बहुचर्चित जमीन घोटाले के मामले में पुणे (Pune) के आरटीआई कार्यकर्ता रविंद्र बराटे (RTI Activist Ravindra Barate) के साथ अन्य साथियो के खिलाफ चतुःश्रृंगी पुलिस स्टेशन में केस दर्ज कराया गया था। इस गिरोह के खिलाफ पुणे शहर (Pune City) के विभिन्न पुलिस स्टशनों में केस दर्ज किया गया है।  इस मामले में फरार आरोपी प्रशांत पुरुषोत्तम जोशी को क्राइम ब्रांच यूनिट-1 (Crime Branch Unit-1) की टीम ने गिरफ्तार (Arrested) कर लिया है। पर्वती के एक विवादित जमीन के घोटाला मामले में रविंद्र बराटे, सस्पेंड पुलिसकर्मी शैलेश जगताप, पत्रकार संजय भोकरे (निवासी सांगली ), पत्रकार देवेंद्र जैन, परवेज जमादार, जयेश जगताप, प्रशांत फाले, विशाल तोत्रे, प्रेमचंद रतनचंद बाफना, प्रशांत बाफना, हरीश किरण बाफना, विनय मूंदड़ा, प्रशांत जोशी के खिलाफ फिरौती, ठगी, अपहरण, और आपसी सांठगांठ से अपराध करने के केस दर्ज है।

    पुणे क्राइम ब्रांच यूनिट-1 की पुलिस टीम शनिवार को अपने क्षेत्र में गश्त लगा रहे थे। इसी दौरान पुलिसकर्मी सचिव जाधव व दत्ता सोनवणे को फरार प्रशांत जोशी के रिश्तेदारों से मिलने आने की जानकारी मिली।  इसके अनुसार प्रशांत पुरुषोत्तम जोशी (46) को कब्जे में लिया गया। आरोपी को आगे की कार्रवाई के लिए चतुःश्रृंगी पुलिस के हवाले कर दिया गया है। इस मामले के सह आरोपी प्रकाश रघुनाथ फाले (41) को इससे पहले गिरफ्तार किया जा चुका है। जबकि इस मामले के आरोपी विशाल तोत्रे की मार्च में मौत हो चुकी है।

    5 करोड़ में सौदा तय किया

    पर्वती की जमीन नीलमणि देसाई के पिता ने दामाद धैर्यशील देसाई के नाम पर किया था। इसमें से कुछ जमीन को डेवलप करने के बाद धैर्यशील के पास 4 हज़ार 913 स्कवायर मीटर जगह शेष बची थी।  धैर्यशील के नाम की जमीन उनके नाम पर कराने का लालच देकर प्रशांत जोशी ने नीलमणि को बताया कि उसकी जमीन शैलेश जगताप और जयेश जगताप लेने को इच्छुक है। संबंधित जमीन पर पति के वारिस के नाम पर कराने का लालच सुचना के अधिकार कार्यकर्ता रविंद्र बराटे ने दिया था। शैलेश जगताप ने नीलमणि से अपनी जमीन ऋषिकेश बारटक्के को  बेचने को कहा और 5 करोड़ में सौदा तय किया।

    झूठे मामले में फंसा देने की धमकी दी

    बारटक्के ने नीलमणि देसाई और उनके बेटे के नाम पर 5-5 लाख रुपए जमा कर दिए। इसके बाद शैलेश जगताप व अन्य ने ऋषिकेश बारटक्के को धमकाकर उससे 20 लाख रुपए वसूले। इसके बाद जमीन की माप नहीं होने देने की धमकी देकर आरोपियों ने पैसे की मांग की। इस जमीन के सौदे के लिए समझौते के तौर पर 3 करोड़ रुपए की मांग की। इसके साथ ही समय समय पर धमकियां देकर शिकायतकर्ता और उनके सहयोगी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए मीडिया व अन्य जरिये से बदनाम किया। साथ ही घर पर आदमी भेजकर झूठे मामले में फंसा देने की धमकी दी।