रोजगार के वैकल्पिक अवसरों की तलाश में सेक्स वर्कर

  • आशा केयर ट्रस्ट की स्टडी रिपोर्ट का दावा

पुणे. अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होने के पुणे का जनजीवन पटरी पर लौटने का इंतजार कर रहा है. मगर देश के तीसरे सबसे बड़े रेड लाइट एरिया बुधवार पेठ में सेक्स वर्कर्स की स्थिति विकट बन गई है. हाल ही में किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि यहां की 99 प्रतिशत सेक्स वर्कर्स अब कोरोनो महामारी के मद्देनजर रोजगार के वैकल्पिक अवसरों की तलाश में हैं. यह अध्ययन आशा केयर ट्रस्ट द्वारा संचालित किया गया था, जो कि सेक्स वर्कर्स के कल्याण के लिए काम करता है.

85 प्रतिशत से अधिक सेक्स वर्कर कर्ज में डूबे

आशा केयर ट्रस्ट पुणे के बुधवार पेठ में स्थित है, जो भारत का तीसरा सबसे बड़ा रेड-लाइट क्षेत्र है. यहां के 700 वेश्यालय में लगभग तीन हजार सेक्स वर्कर्स के आवास हैं. ट्रस्ट के अध्ययन में 300 सेक्स वर्कर्स की प्रतिक्रियाएं शामिल की गई थीं. इसकी रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि लॉकडाउन के दौरान यौन सेवाओं की मांग में भारी कमी आई, जिससे सेक्स वर्कर्स को जीवित रहने के लिए पैसे उधार लेने के लिए मजबूर होना पड़ा. 85 प्रतिशत से अधिक वर्कर ने ऋण लिया है और उनमें से 98 प्रतिशत से अधिक ने उन्हें अपने वेश्यालय के मालिकों, प्रबंधकों और साहूकारों से लिया है, जो आगे शोषण के अधीन हैं.

गुजारे लायक भी नहीं होती आमदनी

अधिक चिंताजनक बात यह है कि 87 प्रतिशत वर्कर्स ने कहा कि महामारी से पहले भी उनकी आमदनी उनके खुद या उनके परिवारों का गुजारा करने के लिए पर्याप्त नहीं थी. शिक्षा और रोजगार योग्य कौशल की कमी जैसे प्रमुख कारक उन्हें आय के एक स्रोत पर निर्भर करने के लिए मजबूर करते हैं, अर्थात देह व्यापार के माध्यम से कमाई और एक दुष्चक्र में फंसे रहना पड़ता है. इस सर्वेक्षण में शामिल लगभग सभी वर्कर्स आजीविका के स्रोत के अन्य विकल्प तलाशने के लिए उत्सुक हैं. रिपोर्ट में इन सेक्स वर्कर्स के कई सामाजिक-आर्थिक कारकों को भी बताया गया है. जबकि उनमें से 82 प्रतिशत 25-45 वर्ष के आयु वर्ग में आते हैं, कुछ को नाबालिग होने पर व्यापार में मजबूर किया गया.

शिक्षा का अभाव बड़ी समस्या

सर्वे में शामिल 84 प्रतिशत से अधिक सेक्स वर्कर्स की कोई औपचारिक शिक्षा नहीं हुई है और बाकी हाईस्कूल खत्म होने से पहले उन्हें देह व्यापार में धकेल दिया गया, ऐसा भी रिपोर्ट से सामने आया है. सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि 92.7 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे सेक्स के काम को फिर से शुरू करने से डरते हैं, मगर वे भुखमरी से भी चिंतित हैं. इस सर्वे रिपोर्ट में आशा केयर ट्रस्ट ने सुझाव दिया कि जिला और राज्य प्रशासन एनजीओ द्वारा डेटा एंट्री, टेलीकॉलिंग, सेल्स, टेलरिंग और वर्किंग जैसे क्षेत्रों में महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत बुनियादी कौशल-प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू कर सकते हैं.