…तो हमे भी आत्महत्या करनी पड़ेगी

  • पुणे साउंड इलेक्ट्रिकल्स जनरेटर इवेंट्स इक्विपमेंट्स वेडर असोसिएशन का मूक मोर्चा
  • बडे़ इवेंट्स को अनुमति देने संबंधी व्यावसायिकों ने की सरकार से मांग

पुणे. ‘हम सब कलाकार, हो गए बेकार’, ‘काम बंद, घर कैसे चलाएं’, ‘व्यवसाय बंद किश्त कैसे चुकाएं’, ‘सामान धूल खा  रहे, गोदाम का किराया कैसे भरू?’ जैसे सवाल उपस्थित करते हुए पुणे साउंड इलेक्ट्रिकल्स जनरेटर इवेंट्स इक्विपमेंट्स वेंडर असोसिएशन द्वारा मूकमोर्चा और धरना आंदोलन किया गया. ‘अनलॉक’ की प्रक्रिया में सारी चीजें शुरु हो रही हैं, तो केवल इवेंट्स पर पाबंदी क्यों? केवल इसी कारण कोरोना का खतरा ज्यादा है क्या? ऐसा तीव्र सवाल व्यावसायियों ने किया. अगर सरकार जल्द से जल्द सार्वजनिक कार्यक्रमों की अनुमति नहीं देती है, तो हमें भी आत्महत्या करनी पड़ेगी, ऐसा इशारा असोसिएशन के पदाधिकारियों द्वारा दिया गया. पुणे कॅम्प से आंबेडकर पुतले से कलेक्टर कार्यालय ऐसा मूकमोर्चा निकाला गया. उसके बाद, व्यापारियों ने कलेक्टर कार्यालय पर धरना दिया.  उसके बाद अपर कलेक्टर विजय सिंह देशमुख को एक बयान दिया गया.

डेढ़ से दो हजार व्यवसायियों ने लिया हिस्सा

इस आंदोलन में लगभग डेढ़ से दो हजार व्यापारियों ने भाग लिया. तो 50 से अधिक विभिन्न संगठनों ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया. इस में मुख्य रूप से महाकला मंडल, मंडप ओनर्स वेल्फेअर असोसिएशन, पिंपरी-चिंचवड साउंड लाईट असोसिएशन, प्रोफेशनल ऑडियो एंड लाइट असोसिएशन (पाला), कलाकार महासंघ, पुणे फूल बाजार के आढत एसोसिएशन, खडकी मंडप असोसिएशन, साउंड लाइट असोसिएशन सातारा, साउंड लाइट असोसिएशन फलटन आदी संस्थाएं शामिल  हैं.  

50 संस्थाओं का भी समर्थन

असोसिएशन के अध्यक्ष बबलू रमजानी ने कहा कि कोरोना की वजह से 7 महीने से कोई सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं हुआ है. इस संबंधित क्षेत्र में काम करने वाले साउंड, लाईट, एलईडी वॉल, जनरेटर्स, ट्रस, कलाकार, फ्लोरिस्ट, डेकोरेटर्स, मंडप, वीडियोग्राफर्स, फोटोग्राफेर्स, बैंड, इवेन्ट कोऑर्डिनेटर डी. जे. जैसे कई व्यवसाय अटके हुए हैं. लाखों रुपयों के इक्विपमेंट्स धूल में पड़े हुए हैं. लगभग 4 से 5 लाख लोग, जो अपनी आजीविका के लिए इस व्यवसाय पर निर्भर हैं, वो भुखमरी का सामना कर रहे हैं. पैसे की समस्या, चूके हुए हुआ किस्तों और निराशा ने कई लोगों को आत्महत्या करने के लिए प्रेरित किया है. इसलिए, सरकार को इसकी गंभीरता को पहचानना चाहिए और हमें तुरंत अन्य व्यवसायों की तरह ही सार्वजनिक कार्यक्रमों के आयोजन करने की अनुमति देनी चाहिए.

तकनीकी कलाकारों को भी बीमा मिले

मेघराज राजेभोसले ने कहा कि इवेंट्स को भव्य रूप देने में सभी तकनीकी कलाकारों का बड़ा योगदान होता है. हालांकि, आज कार्यक्रम ना होने के कारण उन पर भूखे रहने का समय आया हुआ है. उन पर निर्भर रहने वालों की संख्या बहुत बड़ी है. हम सब कला क्षेत्र लोक उनके साथ है, इवेंट्स आयोजित करने के लिए सरकार ने अनुमति देनी चाहिए. इससे उनकी रोजी रोटी पूर्ववत होने में मदद होगी और कलाकार, तकनीशियन कल्याण मंडल स्थापित किया जाऐ, इसके बाद ऐसा ना हो और, हमारे व्यवसाय से संबंधित अपराधों को तत्काल वापस ले. सोमनाथ धेंडे ने कहा कि व्यावसायिकों को किस्तों के पुनर्भुगतान में शिथिलता मिले. परिवहन के संदर्भ में वाहनों की पासिंग, इन्शुरेन्स, कर चुकाने पर छूट प्राप्त करें. सभी तकनीक को कलाकार का दर्जा मिलना चाहिए. व्यावसायिकों को अपने बच्चों के स्कूल और कॉलेज की फीस पर छूट मिलनी चाहिए. व्यावसायिकों अपनी सामग्री रखने के लिए महापालिका के हद्द में जगह और गाला नाममात्र किराये पर उपलब्ध किया जाये. सरकार तकनीशियनों के रूप में काम करने वाले कलाकारों के लिए स्वास्थ्य बीमा लेकर दे.