HEMANT RASNE

    पुणे. कोरोना महामारी ने शहर के सभी क्षेत्रों को प्रभावित किया है। शहर की जीवनदायिनी मानी जानेवाली पीएमपी (PMP)भी इससे छूटी नहीं है। पीएमपी का संचालन कई दिनों से बंद था। साथ ही पीएमपी के कर्मी भी कोविड का काम कर रहे थे, जिसके तहत पीएमपी की हालत खस्ता हो गई है। इस वजह से पुणे महानगरपालिका (Pune Municipal Corporation) द्वारा दिया जानेवाला हिस्सा यानी लगभग 189 करोड़ पीएमपी को मिलें। ऐसी मांग पीएमपी के सीएमडी राजेंद्र जगताप (CMD Rajendra Jagtap) ने पुणे महानगरपालिका कमिश्नर से की थी। 

    पुणे मनपा का ने अब तक 169 करोड़ दिए है। शेष 19 करोड़ की राशि देने से सम्बंधित प्रस्ताव मनपा प्रशासन द्वारा स्थायी समिति के समक्ष रखा गया था। इस पर समिति की मंगलवार बैठक में मंजूरी दी गई। ऐसी जानकारी स्थायी समिति (Standing Committee) अध्यक्ष हेमंत रासने (Hemant Rasne) ने दी। 

    प्रति माह दिए जाते है साढ़े बारह करोड़ 

    वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए पुणे महानगर परिवहन निगम की बैलेंस शीट का ऑडिट मुख्य मुख्य लेखा परीक्षक द्वारा प्रमाणित किया गया है। इसमें 315 करोड़ का घाटा दिखाया गया है। इसमें से से Rs. 189,06,53,933  का भुगतान करना आवश्यक है। पुणे महानगरपालिका का 60% स्वामित्व हिस्सा है। 137,50,00,000 रुपए अब तक पुणे नगरनिगम से (फरवरी 2021 तक प्रति माह 12।50 करोड़)  व 31,75,32,104 रुपए (संपत्ति प्रबंधन विभाग को किराए की वसूली की राशि का समायोजन) ऐसे कुल 169,25,32,104 का भुगतान किया गया है।  इसलिए वर्ष 2019-20 के लिए पुणे नगर निगम से PMPML को 19,81,21,829 रुपए का भुगतान करना आवश्यक है। इसे मंजूरी दी गई। 

    मनपा कर्मियो को सामग्री के लिए निधि

    महानगरपालिका के गुट 3 और 4 में काम करनेवाले कर्मियों और अधिकारियों को उनके विभिन्न कामों के लिए विभिन्न प्रकार की सामग्री दी जाती है। इसमें करीब 80 प्रकार के सामग्री का समावेश है। यह सामग्री लेने के लिए प्रशासन द्वारा डीबीटी के तहत राशि अदा की जाती है। इस साल भी कर्मियों को निधि अदा किया जाएगा। उसके लिए प्रशासन को करीब ढाई करोड़ की लागत आएगी। इससे संबंधित प्रस्ताव प्रशासन द्वारा स्थायी समिति के समक्ष रखा गया था। इस पर समिति की बैठक में चर्चा होकर उसे मंजूरी दी गई। ऐसा स्थायी समिति अध्यक्ष रासने ने कहा।