National Education Policy

पुणे. नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (New national education policy) व्यावसायिक शिक्षा के लिए सहायक साबित होगी। यह शिक्षा नीति व्यावसायिक शिक्षा को मुख्यधारा में लाकर व्यावसायिक शिक्षा में जरूरी बदलाव लाएगी। नई शिक्षा नीति 2020 पर यह मत डॉ. रीता सोनीपत, निदेशक, ईसीई, एम्परसंड ग्रुप ने दिया।

कक्षा छह से व्यवसायिक शिक्षा  

नई शिक्षा नीति-2020 (New Education Policy-2020) को कैबिनेट की मंज़ूरी मिल गई है। इस नई शिक्षा नीति में कक्षा छह से कम से कम पचास प्रतिशत छात्रों को व्यावसायिक शिक्षा में शामिल करने का प्रस्ताव है। वर्तमान में, केवल सीबीएसई स्कूल (Cbse school) छात्रों को वैकल्पिक पेपर के रूप में कुछ व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का चयन करने की अनुमति हैं। डॉ. रीता सोनीपत ने कहा कि  हमारे स्कूल अभी भी व्यावसायिक शिक्षा के विस्तार के बारे में  लचीले नहीं हैं, खासकर छोटी कक्षा के छात्रों के लिये। भारतीय विद्यालयों में दी जाने वाली शिक्षा अभी भी अत्यंत संरचित और प्रक्रिया-आधारित है। तथा व्यावसायिक शिक्षा (Vocational education) का विकल्प भौगोलिक स्थान, बुनियादी ढांचे की उपलब्धता और प्रशिक्षित शिक्षकों,के आधार पर स्कूलों में अलग अलग है। 

बुनियादी ढांऐ का अभाव

अधिकांश ग्रामीण स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा के लिए बुनियादी ढांचा और प्रशिक्षक नहीं है। लेकिन अब हमें उम्मीद है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति इसमें बदलाव लाएगी। डॉ रीता सोनीपत ने वर्तमान शिक्षा की स्थिति पर कहा कि शहरों में कई सरकारी स्कूल हैं जो छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करते है। हालाँकि, ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी और निजी दोनों ही स्कूल विभिन्न कुछ कारणों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने में असफल रहे हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में छात्र ज्यादातर पहली पीढ़ी के शिक्षार्थी होते हैं और उन्हें समुचित शिक्षा का समर्थन करने के लिए अपने समुदाय में और अपने स्कूल में भी सही वातावरण का अभाव होता है। तथा ग्रामीण क्षेत्र में बहुत सारी महिला शिक्षक कार्यरत हैं। जिनके पास बहुत सारी घरेलू जिम्मेदारियां होती हैं। तथा ऊनके पास कोई सामाजिक सहयोग नहीं है। यह भी ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।