Workers not coming to work at the original place

    पुणे. सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) को लेकर आमसभा ने मंजूरी दी है। आमसभा ने मंजूरी (Approval) देकर लगभग तीन माह होने के बावजूद भी अभी तक प्रस्ताव राज्य सरकार के पास नहीं गया था। पहले नगरसचिव विभाग द्वारा प्रस्ताव पुणे महानगरपालिका कमिश्नर (Pune Municipal Commissioner) के पास भेजा गया था। कमिश्नर ने इसे सामान्य प्रशासन और लेखा विभाग के पास भेजा था, लेकिन दोनों विभाग जिम्मेदारी लेने तैयार नहीं थे। एक दूसरे पर जिम्मेदारी ढकेल रहे थे। इससे सरकार के पास प्रस्ताव भेजने में देरी हो रही थी। इसके चलते मनपा कामगार यूनियन द्वारा आंदोलन किया था। जिसके बाद प्रस्ताव कमिश्नर के पास गया, लेकिन विगत 10 दिनों से इस पर कमिश्नर के हस्ताक्षर नहीं हुए थे। सोमवार को कमिश्नर ने यह फाइल फिर नीचे चर्चा के लिए भेज दी थी, लेकिन eनवभारत ने फिर इसको लेकर मुद्दा उठाया। इसके चलते अब कमिश्नर ने मंगलवार को प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए।

    बुधवार को प्रस्ताव सरकार के पास पहुंचा। अब सरकार अंतिम फैसला लेगी। इससे अब पुणे महानगरपालिका कर्मियों में ख़ुशी की लहर है। कई सालों से कर्मी इसकी राह देख रहे थे। 

    2016 को लागू हुआ है आयोग      

    केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय कर्मियों के लिए 1 जनवरी 2016 से 7वां वेतन लागू किया गया है। इसके अनुसार इन कर्मियों को वेतन अदा किया जाता है। इसी तर्ज पर राज्य सरकार ने भी अपने कर्मियों के लिए आयोग लागू किया है। महानगरपालिका पर भी यह आयोग लागू होता है। मनपाकर्मियों के वेतन श्रेणी में सुधार करने के सरकार ने कहा था। महानगरपालिका कर्मियों के ग्रेड पे की वजह से यह मामला अटका हुआ था। नतीजा प्रशासन द्वारा यह प्रस्ताव नहीं रखा जा रहा था। कमिश्नर ने ग्रेड पे और वेतनबैंड का सूत्र रखकर सुधारित वेतनश्रेणी लागू की है। हाल ही में सत्ताधारी पार्टी ने ऑनलाइन सभा लेकर इस पर चर्चा करने का प्रयास किया था, लेकिन नगरसेवकों ने उप सुझावों की बारिश की। कुल 41 उपसुझाव आए थे। उसमें से 22 मंजूर किए तो 19 विसंगत होने के कारण ख़ारिज किया। इसे 10 मार्च को मंजूरी दी है। महानगरपालिका प्रशासन की मानें तो आम सभा की मंजूरी मिलने के बाद इस पर महापौर के हस्ताक्षर होते है। बाद में यह प्रस्ताव नगरसचिव के पास आता है। नगरसचिव कार्यालय द्वारा उसे मनपा कमिश्नर के पास भेजा जाता है। कमिश्नर उसे लेखा अधिकारी व सामान्य प्रशासन विभाग के पास भेजते है। बाद में फिर प्रस्ताव आयुक्त के पास जाता है। उसके बाद कमिश्नर सरकार के पास भेजते है, लेकिन 2 माह के बाद भी यह प्रस्ताव मनपा में ही रुका हुआ था। 

    मंगलवार को हुए हस्ताक्षर 

    ये दोनों विभाग इसकी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं थे। इस वजह से फिर एक बार यह प्रस्ताव मनपा में अटका था, लेकिन इसको लेकर मनपा कामगार यूनियन ने आक्रमक रवैया अपनाया था। 27 मई तक प्रस्ताव सरकार को नहीं गया तो मनपाकर्मी आंदोलन करेंगे। ऐसा यूनियन द्वारा कहा गया था। यूनियन द्वारा इसके लिए वित्त विभाग को जिम्मेदार माना था। सभी कर्मी काला फीता लगाकर काम करेंगे, ऐसा यूनियन ने कहा था। साथ ही आगामी तीव्र आंदोलन करने की चेतावनी भी यूनियन ने दी थी। इसके अनुसार, मनपाकर्मियों द्वारा आंदोलन किया गया था।  मनपा भवन साथ ही क्षेत्रीय कार्यालयों में कर्मियों ने काली फीता लगाकर आंदोलन किया था। इस आंदोलन ने रंग लाया था। प्रस्ताव कमिश्नर के पास गया था, लेकिन एक हफ्ते से प्रस्ताव कमिश्नर के पास वैसे ही पड़ा हुआ था। इस वजह से फिर कर्मी संगठनों ने कमिश्नर से मुलाकात की थी। कमिश्नर ने भरोसा दिलाया था कि जल्द ही सरकार के पास प्रस्ताव भेजा जाएगा। इसके अनुसार अब कर्मियो ने आंदोलन वापस लिया था। शनिवार को राज्य सरकार के पास प्रस्ताव जाएगा, ऐसा माना जा रहा था, लेकिन कमिश्नर ने फाइल चर्चा के लिए भेजी थी। उसके बाद मुख्य लेखापाल ने कमिश्नर को बताया कि सरकार के नियमनुसार प्रस्ताव तैयार किया है। तब कमिश्नर ने मंगलवार को इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए। बुधवार को प्रस्ताव राज्य सरकार के पास भेजा गया। महापालिकाकर्मी व अधिकारीयों को इससे राहत मिल गई है। 

    महानगरपालिका द्वारा वेतन आयोग का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया है। अब राज्य सरकार इसे तत्काल मंजूरी दे। ताकि महापालिका के हजारों कर्मियों को इसका लाभ मिलें क्योंकि वेतन की राशि मनपा ही देनेवाली है।

    -मुरलीधर मोहोल, महापौर, पुणे

    महानगरपालिका के ग्रेड पे के अनुसार वेतन आयोग को मंजूरी दी जाए। ऐसी मांग हमारी 5 संगठन कर रही थी। पूर्व कमिश्नर शेखर गायकवाड़ ने प्रस्ताव तैयार कर आम सभा के पास मंजूरी के लिए दिया था। इस पर उपसुझाव आए। लेखापाल विभाग ने अच्छा काम कर प्रस्ताव पर कमिश्नर के हस्ताक्षर लिए। अब प्रस्ताव सरकार के पास पहुंचा है। इसमें सभी अधिकारी व राजनेताओ की हमें मदद मिली।

    -आशीष चव्हाण, कार्याध्यक्ष, पीएमसी एम्प्लॉइज यूनियन

    2016 साल से वेतन आयोग लागू हुआ है, लेकिन ग्रेड पे के चलते प्रस्ताव अटक गया था। इस पर हमने काफी मेहनत ली। मूल प्रस्ताव, ग्रेड पे, सभी भत्ते, प्रमोशन आदि विषयों को हमने सरकार के नियमानुसार प्रस्ताव में प्रावधान किया है। मनपा कमिश्नर को भी सभी बातें बता दी। उस पर कमिश्नर के हस्ताक्षर होने के बाद प्रस्ताव को सरकार के पास भेजा है। अब सरकार सरकार की मंजूरी मिलने के बाद आयोग लागू किया जाएगा।

    -उल्का कलसकर, मुख्य वित्त व लेखा अधिकारी

    मनपा आम सभा ने मंजूरी देने के बाद भी लगभग तीन माह तक वेतन आयोग का प्रस्ताव मनपा में ही पड़ा हुआ था। तय है कि सत्ताधारी पार्टी की प्रशासन पर पकड़ नहीं है। इसको लेकर शिवसेना ने आम सभा में आवाज उठाया। तब बैठक लेकर प्रशासन को निर्देश दिए थे। फिर भी प्रस्ताव आगे नहीं गया था। इस वजह से हमने मंगलवार की स्थायी समिति में आवाज उठायी। अब प्रस्ताव सरकार के पास गया है। इसे जल्द मंजूरी मिलने हम सरकार से फॉलोअप करेंगे।

    -पृथ्वीराज सुतार, गुटनेता, शिवसेना

    वेतन आयोग के चलते कई कर्मियों के इंक्रीमेंट के मामले अटके हुए है। वेतन आयोग को मंजूरी मिलती है तो कोरोनाकाल में कर्मियों को अच्छी सहायता होगी। राज्य सरकार इसे तत्काल मंजूरी दें।

    -गणेश बिड़कर, सभागृह नेता, पुणे महानगरपालिका