तकनीकी तरीके से एटीएम में चोरी करनेवाले गिरफ्तार

  • 66 लाख की चोरी उजागर
  • आरोपियों में इंजीनियर भी शामिल
  • क्राइम ब्रांच यूनिट-3 की कामयाबी

पिंपरी. एटीएम सेंटरों में चोरी की बढ़ती वारदातों के बीच पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस की क्राइम ब्रांच ने यूनिट -3 को बड़ी सफलता मिली है. पुलिस ने 2 ऐसे आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जोकि एटीएम मशीन में तकनीकी बदलाव कर चोरी करते थे. इनमें एक इंजीनियर भी शामिल है जो कि एटीएम मशीन बनाने और दुरुस्त करनेवाली कंपनी में काम कर चुका है. इन आरोपियों से एटीएम मशीन से चुराई गई 66 लाख रुपये नकद बरामद कर ली गई है.

पुलिस रिमांड में भेजे गए

गिरफ्तार आरोपियों के नाम मनोज उत्तम सूर्यवंशी (30) और किरण भानुदास कोलते (35) हैं. उनके पास से 66 लाख 10 हजार 100 रुपये नकद और वारदात में इस्तेमाल की गई दोपहिया समेत कुल 66 लाख 70 हजार रुपए का माल बरामद किया गया है. अदालत में पेश करने पर दोनों आरोपियों को 4 दिन तक पुलिस कस्टडी में भेजने का आदेश दिया गया है. इस बारे में संवाददाता सम्मेलन में जानकारी देते हुए पिंपरी-चिंचवड शहर के पुलिस कमिश्नर कृष्ण प्रकाश ने बताया कि दिघी के वडमुखवाडी में एसबीआई बैंक के 2 एटीएम सेंटरों में चोरी की घटना घटी. चोरों ने बडी चालाकी से तकनीकी बदलाव कर इस चोरी को अंजाम दिया. यूनिट-3 के वरिष्ठ पुलिस निरिक्षक शंकर बाबर ने चोरों तक पहुंचने के लिए 2 टीमें गठित की. तकनीकी जांच और यूनिट-3 के सहायक पुलिस निरीक्षक सतीश कांबले को मुखबिर से मिली जानकारी के अनुसार पिंपरी में जाल बिछाकर दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया गया.

एक आरोपी एटीएम मशीन के मरम्मत का काम करता था

पुलिस कमिश्नर ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में शामिल मनोज सूर्यवंशी एटीएम मशीन बनाने वाली कंपनी में इंजीनियर के तौर पर काम करता था. एटीएम मशीन बनाने, दुरुस्ती करने में एक्सपर्ट था. बाद में कम वेतन का बहाना बनाकर उसने काम छोड़ दिया था. उसी ने एटीएम मशीन से पैसे चुराने की साजिश रची और उसमें अपना पूरा तकनीकी दिमाग इस्तेमाल किया. दो-तीन बार एटीएम मशीन चेक करने गए थे, उस समय पैसा कम डाला हुआ था.उस समय अपना मोबाइल साथ लेकर गया था.24 सितंबर की रात एटीएम में ज्यादा पैसा होने पर मशीन के पीछे से तकनीकी तरीके का इस्तेमाल करके मशीन खोला और पैसा चुराकर फिर ऐसे ढंग से बंद कर दिए ताकि किसी को खबर न लग सके.उस दिन मनोज जानबुझकर अपना मोबाइल साथ नहीं ले गया था.

सीसीटीवी को सेलो टेप से ढंक दिया

वारदात के दौरान आरोपियों ने एटीएम सेंटर में लगे सीसीटीवी कैमरे को सेलो टेप से ढक दिया था. इसी कारण मामले कि जांच में बडी मुश्किल से सीसीटीवी कैमरे के फूटेज प्राप्त हुए. उसी आधार पर चोरों तक पहुंचने में अपराध शाखा की टीम कामयाब रही. ऐसी ही एक चोरी 2017 में तलेगांव दाभाडे में की गई थी जिसकी जांच आज भी अधूरी है. पूछताछ के दौरान आरोपियों से एक और मामले की जानकारी मिली है. इस कार्रवाई को वरिष्ठ पुलिस निरिक्षक शंकर बाबर, सहायक पुलिस निरिक्षक सतिश कांबले, पुलिस उपनिरिक्षक गिरीश चामले, कर्मचारी हजरत पठाण, यदु आढारी, सचिन मोरे, सागर जैनक, त्रिनयन बालसराफ, प्रविण पाटिल, गंगाधर चव्हाण, योगेश्वर कोलेकर, राजकुमार हनमते, राहुल सुर्यवंशी, विठ्ठल सानप, महेश भालचिम, प्रमोद ढाकणे, नाथा केकाण, गजानन आगलावे व नागेश माली की टीम ने अंजाम दिया.

कई एटीएम में सुरक्षा गार्ड नहीं

पुलिस कमिश्नर कृष्ण प्रकाश ने बैंकों के बारे में कहा कि कई बैंकों के एटीएम सेंटरों में सुरक्षा गार्ड नहीं होते. सीसीटीवी कैमरा भी कई एटीएम केंद्रों में नहीं होते. चोरी होने पर बीमा कंपनी से क्लेम का पैसा मिल जाता है, शायद इसलिए बैंकों की ओर से लापरवाही की जाती है. बीमा कंपनी ऐसे क्लेम को बंद करना चाहिए जिनके एटीएम केंद्रों में सुरक्षा गार्ड नहीं है. एटीएम में जमा पैसा देश का होता है, जनता का पैसा होता. जगह-जगह एटीएम सेंटर खोले जा रहे, लेकिन बैंकों की ओर से 10-15 हजार के सुरक्षा गार्ड नहीं लगाए जाते. इस बारे में बैंक मैनेजरों की एक बैठक बुलाई जाएगी और सुरक्षा गार्ड, सीसीटीवी लगाने के बारे में सख्त निर्देश दिए जाएंगे.