स्वास्थ्य विभाग’ की ‘सेहत’ हमेशा बिगड़ी हुई क्यों?

  • स्वास्थ्य प्रमुख का पद बना विवाद का मुद्दा

पुणे. शहर में कोरोना का प्रकोप दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है, लेकिन उधर महापालिका स्वास्थ्य विभाग, मनपा प्रशासन और राज्य सरकार इस पर गंभीर नहीं है, ऐसा सामने आ रहा है. क्योंकि विगत 10 सालों से स्वास्थ्य विभाग प्रमुख पद विवाद में रहा है. शहर में कोरोना की बदतर स्थिति होने के बावजूद भी स्वास्थ्य विभाग प्रमुख नियुक्ति को लेकर गंभीरता नहीं दिख रही है. क्योंकि स्वास्थ्य प्रमुख डॉ रामचंद्र हंकारे का कालावधि आगामी 2 माह में ख़त्म होगा. उससे पहले ही उन्होंने बदली की मांग की है. राज्य सरकार भी पूरे समय के लिए अधिकारी देने को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है. इससे पुणेकरों को परेशानी का सामना हमेशा करना पड़ता है. इस वजह से सवाल उठाया जा रहा है कि क्या स्वास्थ्य विभाग की सेहत ठीक होगी?

पूरे समय के लिए अधिकारी की आवश्यकता

ज्ञात हो कि महापालिका में स्वास्थ्य प्रमुख का पद मनपा कमिश्नर के बाद महत्वपूर्ण माना जाता है. क्योंकि शहर के स्वास्थ्य की ख्याल करने की पूरी जिम्मेदारी इस विभाग पर होती है. इस वजह से विभाग के लिए पूरे समय के लिए स्वास्थ्य प्रमुख की आवश्यकता होती है. मांग की जाती है कि वह अधिकारी स्थानीय हो. मुख्य स्वास्थ्य प्रमुख डॉ आर. आर. परदेशी सेवानिवृत्त होने के बाद मनपा को मुख्य स्वास्थ्य प्रमुख नहीं मिल पाया था. प्रभारी स्वास्थ्य प्रमुख पद के भरोसे इसका कामकाज किया जा रहा था. डॉ एस. टी. परदेशी ने कई दिनों तक इसका जिम्मा संभाला था. लेकिन परदेशी सेवानिवृत्त होने के बाद मनपा को कई सालों तक मनपा को पूरे समय के लिए अधिकारी नहीं मिल पाया था. नियुक्ति का विवाद कोर्ट में भी चला गया था. काफी आलोचना के बाद दो साल पहले सरकार ने पूरे समय के लिए डॉ रामचंद्र हंकारे के रूप में अधिकारी दिया था. लेकिन अब उनका कालावधि भी ख़त्म हो रहा है. उससे पहले हंकारे बीमार होने के कारण कई दिनों तक छुट्टी पर थे. इस वजह से इसका जिम्मा सहायक स्वास्थ्य अधिकारी डॉ अंजली साबणे दिया था. अब हंकारे छुट्टी से वापस आए है, फिर भी पद साबणे संभल रही है. क्योंकि हंकारे अब मनपा से कार्यमुक्ति की मांग कर रहे है. लेकिन कोरोना की स्थिति कम करने के लिए कोई प्रयास करता हुआ नजर नहीं आ रहा है. सरकार ने डॉ नितिन बोलिलकर के रूप में मनपा को सहायता के लिए स्वास्थ्य अधिकारी दिया था. लेकिन वो भी कुछ खास काम नहीं कर पाए है.

स्थानीय अधिकारी क्यों नहीं दिया जाता? 

स्वास्थ्य विभाग प्रमुख का पद विभिन्न शर्तों की वजह से हमेशा विवाद में रहता है क्योंकि इन शर्तों के अनुसार मनपा का एक भी अधिकारी इसके लिए पात्र नहीं हो पाता है. इस वजह से इसके लिए सरकार पर अवलम्बित रहना पड़ता है. लेकिन पुणे से स्थानीय अधिकारी देने की मांग की जाती है. क्योंकि मनपा में लगभग 4 स्वास्थ्य अधिकारी वरिष्ठ है. इसमें डॉ कल्पना बलिवन्त, डॉ अंजली साबणे, डॉ वैशाली जाधव और डॉ संजीव वावरे का समावेश है. ये लोग पात्रता में बैठ नहीं पाते. इस वजह से इनमें से किसी को अवसर नहीं मिल रहा है. जबकि इन लोगों का कई सालों का अनुभव है. इनके अनुभव का लाभ उठाना आवश्यक है. उसके लिए शर्तों को शिथिल करने की कार्यवाही सरकार द्वारा होना आवश्यक है. इससे कोरोना का सामना डटकर करने में सहायता मिलेगी.