If your child is stubborn, then handle this way

-सीमा कुमारी  

अक्सर पेरेंट्स की ये शिकायत रहती है, की उनका बच्चा बहुत जिद्दी हो गया है. वो जब भी अपने बच्चे के साथ कहीं बाहर या मार्केट जाते है, तो बच्चा चीखने चिल्लाने लगता है की उसे ये सामान चाहिए. चाहे वो उनके बजट में हो या ना हो. तो समझना ये है की बच्चे में ये जिद्दीपन आया कहा से? 6-11 साल तक की उम्र के बच्चे लगभग कच्चे घड़े के सामान होते है. ये अपने आस-पास के माहौल को बड़ी उत्सुकता से देखने और सीखने की कोशिश करते है. जैसे मम्मी-पापा क्या कर रहे हैं और क्या कह रहे है, वो आपस में लड़ाई में क्या बातें कर रहे है. बच्चा दोनों के कहने और करने के बीच के अंतर को समझने की कोशिश करता है. इससे बच्चे के मन में दुविधा पैदा होती है और पहली बार बच्चा अपने बड़ो से असहमत होना शुरु होता है. बच्चा जिद्दी बनता चला जाता है. अब बच्चा अपनी डिमांड करना शुरू कर देता है. आपको ये समझना होगा की आप जो भी कह रहे है और जो भी कर रहे है उसका बच्चे के नाजुक मन पर बहुत गहरा असर पड़ता है.

जिद्दी बच्चों का व्यवहार सुधारने के लिए अपनाएं ये टिप्स:

अच्छा बर्ताव करें: बच्चा जब उल्टी-सीधी हरकतें करे तो उसे पीटकर या तेज डांट लगाकर अपना सारा गुस्सा उस पर ना उतारें. उस वक्त आपको भले ही बच्चे को सुधारने का यह सबसे ज्यादा कारगर तरीका लगे लेकिन इसका बच्चे पर बुरा प्रभाव पड़ता है.

प्यार से समझाएं: अगर बच्चा कोई गलत हरकत या किसी चीज के लिए जिद करता है तो उसे आंख दिखाने की बजाय प्यार से समझाएं. बच्चे के सामने उसकी तुलना किसी और बच्चे से ना करें.

ज्यादा लाड प्यार: ध्यान रखें की कभी कभी एक्स्ट्रा केयर और ज्यादा रोक-टोक बच्चे को जिद्दी बना देता है.

बच्चें की गलत डिमांड को ना पूरा करें: बच्चें की कोई ऐसी डिमांड जो उसके भविष्य के लिए ठीक ना हो उसे पूरा नहीं करें. अगर बच्चा ज़िद पर अड़ जाए तो उसे उससे अच्छी दूसरी चीज दिला दीजिये.

बच्चें से सदा पूछें उसकी राय: आप अपने बच्चें से अपनी परेशानियों के हल मांगे. जैसे कि आप अपने बच्चें से अपने ऑफिस की समस्याओं को सरल बनाकर बच्चें से उसकी राय मांगे. उससे अपनी रोजमर्रा की बातों को शेयर करें . इससे आपके बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वह आपके सामने और खुलकर बात करेंगे. बजाय यह बताने के, कि उसे क्या करना है, आप उससे पूछना शुरू करें कि आप कैसे कुछ नया और अलग कर सकते हैं? ऐसा करने से उसे अपनी अहमियत महसूस करने में मदद मिलेगी.

बच्चों कि तारीफ करना न भूलें: कई बार माता-पिता अपने बच्चों को प्रोत्साहित नहीं करते हैं. वे सिर्फ दूसरे बच्चों से तुलना करते हैं. आपके बच्चें में भी कोई न कोई अच्छी बात तो जरूर होगी जिसकी तारीफ आप कर सकते हैं. ऐसा करने से आप अपने  बच्चें को जिद्दी बच्चे बनने से रोक सकते हैं. इसे एक एग्जांपल की मदद से समझना आसान हो सकता है. जैसे आप अपने ऑफिस में या घर में कोई काम करते हैं तो परिवार के सदस्य आपकी तारीफ करते हैं की आपने ये काम बहुत अच्छे से किया या कोई ऑफिस का कोई प्रोजेक्ट वर्क अच्छा हुआ तो आपकी तारीफ कि जाती है.

ऐसे में आपका मनोबल बढ़ता है और आप पॉजिटिव फील करते हैं. इसी तरह  बच्चें के साथ भी करें. अगर आपका बच्चा आराम से बिना परेशान किए खाना खा लेता है या खेलने के बाद आपने खिलौने सही स्थान पर रखता है तो उसकी तारीफ करें. ऐसा करने से वो अन्य कामों में भी मन लगा सकता है.