Auspicious time, worship method, mantra and story of Navratri Ghatasthapana

-सीमा कुमारी 

हिन्दू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व होता है. नवरात्रि में मां नवदुर्गा की उपासना पूरे विधि विधान से की जाती हैं. नवरात्रि हर वर्ष श्राद्ध खत्म होते ही शुरू होता है, लेकिन इस बार अधिक मास लगने के कारण 25 दिन बाद शुरू हुआ. इस बार नवरात्रि 17 अक्टूबर से 25 अक्टूबर  तक रहेंगी. अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन होगी, जिसके कारण नवरात्रि में देवी आराधना के लिए पूरे 9 दिन मिलेंगे. 17 तारीख को घट स्थापना होगी, इसके बाद 18 को नवरात्रि का दूसरा दिन, 19 को तीसरा, 20 को चौथा, 21 को पांचवां, 22 छठा, 23 को सातवां दिन रहेगा. 24 तारीख को सूर्योदय के वक्त अष्टमी और दोपहर में नवमी तिथि रहेगी. अगले दिन शाम के समय यानी विजय मुहूर्त में दशमी तिथि होने से 25 अक्टूबर को दशहरा पर्व मनाना चाहिए.

नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है. शैलीपुत्री हिमालय की पुत्री हैं . इसी वजह से मां के इस स्वरूप को शैलपुत्री कहा जाता है . इनकी आराधना से हम सभी को मनोवांछित फल मिलती है   मां शैलपुत्री को प्रसन्न करने के लिए मंत्र जपना चाहिए . इसके प्रभाव से माता जल्दी ही प्रसन्न होती हैं और भक्त की सभी कामनाएं पूर्ण करती हैं.

माँ शैलपुत्री की पूजा विधि:

  • नवरात्रि के प्रथम दिन सुबह स्नान करके माता दुर्गा, भगवान गणेश नवग्रह कुबेरादि की मूर्ति के साथ-साथ कलश स्थापन करें. कलश के ऊपर रोली से ॐ और स्वास्तिक लिखे.  
  • कलश स्थापन के समय अपने पूजा घर में पूर्व के कोण की तरफ अथवा घर के आँगन से पूर्वोत्तर भाग में पृथ्वी पर सात प्रकार के अनाज के साथ रेत रखें. 
  • फिर जौ डाले इसके बाद कलश में जल गंगाजल, लौंग, इलायची, पान, सुपारी, रोली, मोली, चन्दन, अक्षत, हल्दी, रुपया पुष्प डालें फिर ॐ भूम्यै नमः कहते हुए कलश को सात अनाजों सहित रेत के ऊपर स्थापित करें.
  • अब कलश में थोड़ा और जल-गंगाजल डालते हुए ॐ वरुणाय नमः कहें और जल से भर दें.
  • इसके बाद आम का पल्लव या पीपल, बरगद, गूलर अथवा पाकर में से किसी  भी वृक्ष का पल्लव कलश के ऊपर रखें तत्पश्च्यात जौ या कच्चा चावल कटोरे मे भरकर कलश के ऊपर रखें और अब उसके ऊपर चुन्नी से लिपटा हुआ नारियल रखें. 
  • हाथ में हल्दी, अक्षत पुष्प लेकर इच्छित संकल्प लें बाद  इस मंत्र के साथ दीप पूजा करें. 

 मंत्र:

ॐ दीपो ज्योतिः परब्रह्म दीपो ज्योतिर्र जनार्दन

मंत्र संख्या पूर्ण होने के बाद मां दुर्गा के चरणों में अपनी मनोकामना व्यक्त करके मां से प्रार्थना करें तथा आरती एवं कीर्तन करें मंत्र के साथ ही हाथ के पुष्प मनोकामना गुटिका एवं मां के तस्वीर के ऊपर छोड़ दें. इसके बाद भोग अर्पित करें तथा मां शैलपुत्री के मंत्र का जाप करें. यह जप कम से कम 108 होना चाहिए.

माँ शैलपुत्री की कथा:

एक बार जब सती के पिता प्रजापति दक्ष ने यज्ञ किया तो इसमें सारे देवताओं को निमंत्रित किया, पर भगवान शंकर को नहीं. सती अपने पिता के यज्ञ में जाने के लिए उत्सुकः हुईं पर  शंकरजी ने कहा कि सारे देवताओं को निमंत्रित किया गया है उन्हें नहीं. ऐसे में वहां जाना उचित नहीं है. परन्तु सती संतुष्ट नही हुईं. सती का प्रबल आग्रह देखकर शंकरजी ने उन्हें यज्ञ में जाने की अनुमति दे दी. सती जब घर पहुंचीं तो सिर्फ मां ने ही उन्हें स्नेह दिया. बहनों की बातों में व्यंग्य और उपहास के भाव थे. भगवान शंकर के प्रति भी तिरस्कार का भाव था.

दक्ष ने भी उनके प्रति अपमानजनक वचन कहे. इससे सती को क्लेश पहुंचा. वे अपने पति का यह अपमान न सह सकीं और योगाग्नि द्वारा अपनेआप को जलाकर भस्म कर लिया. इस दारुण दुख से व्यथित होकर शंकर भगवान ने तांडव करते हुये उस यज्ञ का विध्वंस कर दिया. यही सती अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्मी और शैलपुत्री कहलाईं. शैलपुत्री का विवाह भी फिर से भगवान शंकर से हुआ. शैलपुत्री शिव की अर्द्धांगिनी बनीं. इनकी महत्व और शक्ति अनंत है. अन्य नाम- सती, पार्वती, वृषारूढ़ा, हेमवती और भवानी भी इसी देवी के अन्य नाम हैं.

नवरात्रि पूजा का शुभ मुहूर्त:

  • सुबह 8:36 से 10:53 तक.
  • सुबह 11:36 से दोपहर 12:24 तक. 
  • दोपहर 2:26 से शाम 4:17 तक.