करें इन चमत्कारी मंत्रों का जाप, हर संकट से होंगे मुक्त

सीमा कुमारी

हिन्दू श्रुति ग्रंथों को पारंपरिक रूप से मंत्र कहा जाता है. इसका शाब्दिक अर्थ विचार या चिन्तन होता है. मंत्रणा, और मंत्री इसी मूल से बने शब्द हैं. मन्त्र भी एक प्रकार की वाणी है, परन्तु साधारण वाक्यों के समान वे हमको बन्धन में नहीं डालते, बल्कि बन्धन से मुक्त करते हैं |
मंत्र 3 प्रकार के होते हैं- सात्विक, तांत्रिक और साबर. सभी मंत्रों का अपना-अलग महत्व है. प्रतिदिन जपने वाले मंत्रों को सात्विक मंत्र माना जाता है. जानते हैं ऐसे कौन से मंत्र हैं जिनमें से किसी एक को प्रतिदिन जपना चाहिए जिससे मन की शक्ति ही नहीं बढ़ती, बल्कि सभी संकटों से मुक्ति भी मिलती है |

1) क्लेशनाशक मंत्र : -मंत्र प्रभाव :

क्लेशनाशक मंत्र : कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणत क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नम:॥
इन मंत्रों के जप या स्मरण के वक्त सामान्य पवित्रता का ध्यान रखें. जैसे घर में हो तो देवस्थान में बैठकर, कार्यालय में हो तो पैरों से जूते-चप्पल उतारकर इन मंत्र और देवताओं का ध्यान करें. इससे आप मानसिक बल पाएंगे, जो आपकी ऊर्जा को जरूर बढ़ाने वाले साबित होंगे. इस मंत्र का नित्य जप करने से कलह और क्लेशों का अंत होकर परिवार में खुशियां वापस लौट आती हैं |

2) शांतिदायक मंत्र :

श्री राम, जय राम, जय जय राम ;-मंत्र प्रभाव :
हनुमानजी भी राम नाम का ही जप करते रहते हैं. कहते हैं राम से भी बढ़कर श्रीराम का नाम है. इस मंत्र का निरंतर जप करते रहने से मन में शांति का प्रसार होता है, चिंताओं से छुटकारा मिलता है तथा दिमाग शांत रहता है. राम नाम के जप को सबसे उत्तम माना गया है. यह सभी तरह के नकारात्मक विचारों को समाप्त कर देता है और हृदय को निर्मल बनाकर भक्ति भाव का संचार करता है |

3) चिंता मुक्ति मंत्र :

>ॐ नम: शिवाय ;- मंत्र प्रभाव :
इस मंत्र का निरंतर जप करते रहने से चिंतामुक्त जीवन मिलता है. यह मंत्र जीवन में शांति और शीतलता प्रदान करता है। शिवलिंग पर जल व बेलपत्र चढ़ाते हुए यह शिव मंत्र बोलें व रुद्राक्ष की माला से जप भी करें. तीन शब्दों का यह मंत्र महामंत्र है |

4) संकटमोचन मंत्र :

ॐ हं हनुमते नम :- मंत्र प्रभाव :
यदि दिल में किसी भी प्रकार की घबराहट, डर या आशंका है तो निरंतर प्रतिदिन इस मंत्र का जप करें और फिर निश्चिंत हो जाएं. किसी भी कार्य की सफलता और विजयी होने के लिए इसका निरंतर जप करना चाहिए. यह मंत्र आत्मविश्वास बढ़ाता है. हनुमानजी को सिंदूर, गुड़-चना चढ़ाकर इस मंत्र का नित्य स्मरण या जप सफलता व यश देने वाला माना गया है. यदि मृत्युतुल्य कष्ट हो रहा है, तो इस मंत्र का तुरंत ही जप करना चाहिए |