शुक्रवार शाम होगा यम को दीपदान, शनिवार सुबह किया जाएगा औषधि स्नान, ऐसे करें पूजा

पांच दिन का दीपोत्सव प्रारंभ हो चूका है। आज कार्तिक महीने के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि है, जिसे चतुर्दशी या नरक चौदस के रूप में मनाया जाता है। स्कंद पुराण के अनुसार, आज एक दिन शाम में यमराज के लिए दीपदान किया जाता है, मन्यता है कि ऐसा करने से अकाल मृत्यु नहीं होती। वहीं, भविष्य और पद्म पुराण के मुताबिक, चतुर्दशी तिथि में सूर्योदय से पहले उठकर तेल मालिश कर औषधि स्नान करने से बीमारियां खत्म होती हैं और उम्र भी बढ़ती है।

वहीं ज्योतिषाचार्य पं. गणेश मिश्र बताते हैं कि, चतुर्दशी की तिथि 13 नवंबर को दोपहर करीब 3 बजे से शुरू होकर 14 की दोपहर 2 तक रहेगी। इसलिए यम दीपदान शुक्रवार की शाम और औषधि स्नान 14 नवंबर को सूर्योदय से पहले करना शुभ माना जाएगा। 

दीपदान और यम पूजन-
आज कार्तिक महीने की चतुर्दशी तिथि है। इस दिन यमराज को प्रसन्न करने के लिए सूर्यास्त के बाद दक्षिण दिशा में दीपदान करना चाहिए। मान्यता है कि. दीपदान करने से यमराज खुश होते हैं और कभी अकाल मृत्यु नहीं होती है। साथ ही जाने-अनजाने में किए गए पापों का भी नाश होता है। इससे प्रसन्न होकर यम आरोग्य और लंबी उम्र का आशीर्वाद देते हैं। चतुर्दशी के दिन प्रदोष काल में यमराज को दीपदान करना शुभ माना जाता है। 

दीपदान-
यमराज को दीपदान करने के लिए पहले हल्दी डालकर गेंहू का आता अच्छी तरह गूंध लें फिर उससे एक चौमुखा दीपक बना लें। फिर उसमें दो लंबी बाती को ऐसे रखें की उसे चारों तरफ से जलाया जा सके। उसके बाद दीपक को तिल के तेल से भरें और उसमें थोड़े से काले तिल भी डाल दें। फिर रोली, अक्षत और फूल से दीपक की पूजा करें और दक्षिण दिशा में खील या गेंहूं की ढेरी बनाकर दीपक को रख दें। अब हाथ में फूल लेकर यम के लिए मंत्र बोलकर फूल को दीपक के पास छोड़ दें। 

मंत्र- मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन च मया सह।
        त्रयोदश्यां दीपदानात सूर्यज: प्रीयतामिति॥

अर्थात- त्रयोदशी को दीपदान करने से मृत्यु, पाश, दण्ड, काल और लक्ष्मी के साथ सूर्यनंदन यम प्रसन्न हों। इस मंत्र के द्वारा लक्ष्मी जी भी प्रसन्न होती हैं। 

अभ्यंग और औषधि स्नान-
भविष्य पुराण के अनुसार, कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को सूर्योदय से पहले उठकर तिल के तेल की मालिश करनी चाहिए। उसके साथ स्नान करना चाहिए। ऐसा करने से सेहत अच्छी बनी रहती है। पद्म पुराण में लिखा है कि जो सूर्योदय से पहले नहाता है, वो यमलोक नहीं जाता। इसलिए इस दिन सूर्य उदय होने से पहले औषधियों से नहाना चाहिए।

क्या है औषधि स्नान ?
नरक चतुर्दशी को सूर्योदय से पहले उठकर तिल या सरसो के तेल से पूरे शरीर में मालिश करनी चाहिए। उसके बाद अपामार्ग से शरीर पर पानी छिड़कना चाहिए। फिर मोकि के टुकड़े और अपामार्ग दोनों को अपने सिर के चारों ओर सात बार घुमाकर इसे अपने घर के दक्षिण दिशा में विसर्जित कर नहाना चाहिए।