शिव पूजन में भूलकर भी ना करे इन चीजों का इस्तमाल, होगा विपरीत परिणाम

देवों के देव महादेव को प्रसन्न करने के लिए शिव भक्तों के लिए महाशिवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण दिन होता हैं. फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष में यह दिन मनाया जाता हैं. शिवपुराण के अनुसार इस दिन भगवान शिव और

देवों के देव महादेव को प्रसन्न करने के लिए शिव भक्तों के लिए महाशिवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण दिन होता हैं. फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष में यह दिन मनाया जाता हैं. शिवपुराण के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था.  भगवान शिव हर समय शिवलिंग में विराजमान रहते हैं इसलिए उनकी उसी रूप में पूजन किया जाता हैं. अपने आराध्य को खुश करने के लिए भक्त विभिन्न प्रकार के वस्तुएं अर्पित करते हैं, जिससे उनकी पूजा संपन्न होसके और पूजा का फल उन्हें मिले। 

भगवान शिव के पूजन के वक़्त विभिन्न प्रकार के वस्तुएं अर्पित किए जाते हैं. जिसमे बेलपत्र मुख्या हैं. भोले भंडारी को यह सबसे प्रिय हैं. इसके बिना उनकी पूजा अधूरी हैं. ठीक उसी तरह कई वस्तुएं शिव पूजन में वर्जित हैं, गलती से भी इन चीजों को अर्पित किया गया तो पूजा का फल नहीं मिलता। आइए जानते उन के बारे में जिसे पूजा के समय वर्जित किया गया हैं.  

सिंदूर और हल्दी 
भगवान शिव कैलाश में रहने वाले एक बैरागी हैं. उन्हें किसी भी वस्तुयों से कोई प्रेम नहीं। वही सिंदूर और हल्दी सौभाग्य का प्रतिक है.जिसके कारण उन्हें सिंदूर और हल्दी नहीं चढाई जाती। 

शंख से पानी 
हमारे शास्त्रों में भगवान को शंख से अभिषेक करना वर्जित हैं. दरअसल, भगवन शिव ने शंखशुड नानक दैत्य का अपने त्रिशूल से वध कर दिया था. शंखशुड भगवन व्रिष्णु का भक्त था. जिसके वजह से भगवन व्रिष्णु ने उसके भस्म से शंख निर्मित कर उसे ग्रहण किया. जिसके वजह से महादेव को शंख से अभिषेक नहीं किया जाता. 

तुलसी दल 
तुलसी हर शुभ काम में इस्तमाल किया जाता हैं. लेकिन शिव आराधन में वर्जित हुआ हैं. इसके पीछे भी एक कहानी हैं, जिसके अनुसार भगवान शिव ने जालंधर नामक राकछस का वध कर दिया था, वही उसकी पत्नी तुलसी के पौधे में बदल गई. जिसके वजह से भगवन शिव को तुलसी नही चढ़ाई जाती.

नारियल का पानी 
शास्त्रों में नारियल पानी को सबसे पवित्र माना गया हैं. हर शुभ काम में नारियल पानी का इस्तमाल किया जाता हैं. वहीँ शिव पूजन में इसका इस्तमाल वर्जित है. भगवन शिव को नारियल अर्पित किया जाता हैं, लेकिन उसके जल से अभिषेक नहीं किया जाता। नारियल देवी लक्ष्मी का प्रतिक हैं. 

टूटे हुए चावल 
सनातन धर्म में अक्षत का बड़ा महत्व हैं. हर शुभ काम में इसका इस्तमाल किया जाता हैं. शिव पूजन में भी इसका इस्तमाल किया जाता है. वहीँ टूटे हुए चावल को अपवित्र और अपूर्ण समझा जाता हैं. जिसके कारण इसको अर्पित करने से पूजा सफल नहीं होती।

केतकी का फुल 
भगवन शिव को हर प्रकार के पुष्प अर्पित किए जाते हैं. सिर्फ़ एक को छोड़ कर. दरअसल भगवन व्रिष्णु और ब्रम्हा के बीच कौन सबसे बड़ा इसको लेकर स्पर्धा हुई. जिसमे ब्रम्हा जीने झूठ बोला और उनके इस झूठ में केतकी ने उनका साथ दिया था. जिसके बाद भगवन शिव ने अपने पूजन में केतकी के फूल के इस्तमाल नही होने का श्राप दिया था.