माँ दुर्गा का सातवां रूप देवी कालरात्रि, इस तरह करें माँ की आराधना

-सीमा कुमारी

आज नवरात्रि का सातवां दिन है और इस दिन माँ दुर्गा के सातवें रूप देवी कालरात्रि की पूजा की जाती है. ये देवी माँ दुर्गा के क्रोध से प्रकट हुआ स्वरूप है. कहा जाता है कि देवी दुर्गा ने असुर रक्तबीज का वध करने के लिए कालरात्रि को अपने तेज से उत्पन्न किया था. इनकी उपासना से प्राणी सर्वथा भय मुक्त रहता है. दानव, भूत, प्रेत, पिशाच आदि इनके नाम लेने मात्र से भाग जाते हैं. मां कालरात्रि का स्वरूप काला है, लेकिन यह सदैव शुभ फल देने वाली हैं. इसी कारण इनका एक नाम शुभकारी भी है. 

इनके शरीर का रंग काला है. मां कालरात्रि के गले में नरमुंड की माला है. कालरात्रि के तीन नेत्र हैं और उनके केश खुले हुए हैं. मां गर्दभ (गधा) की सवारी करती हैं. मां के चार हाथ हैं एक हाथ में कटार और एक हाथ में लोहे का कांटा है. देवी कालरात्रि का स्वरूप डरावना है. देवी के इसी स्वरूप की पूजा करने से दुश्मनों पर भी जीत मिलती है और रोग, महामारी और हर तरह की परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए देवी के इस स्वरूप की पूजा की जाती है. देवी कालरात्रि की पूजा शुक्रवार २२ अक्टूबर की जाएगी.

कैसे करें माता की पूजा:

  • मां कालराज्ञि की पूजा सुबह करनी चाहिए. 
  • मां की पूजा के लिए लाल रंग के कपड़े पहनने चाहिए. 
  • मकर और कुंभ राशि के जातकों को कालरात्रि की पूजा जरूर करनी चाहिए. 
  • परेशानी में हों तो सात या सौ नींबू की माला देवी को चढ़ाएं.
  • सप्तमी की रात्रि तिल या सरसों के तेल की अखंड ज्योत जलाएं. 
  • सिद्धकुंजिका स्तोत्र, अर्गला स्तोत्रम, काली चालीसा, काली पुराण का पाठ करना चाहिए.
  • यथासंभव, इस रात्रि संपूर्ण दुर्गा सप्तशती का पाठ करें.

कालरात्रि पूजा मंत्र:

मंत्र:ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तु ते।।
जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्तिहारिणि।
जय सर्वगते देवि कालरात्रि नमोस्तु ते।।
धां धीं धूं धूर्जटे: पत्नी वां वीं वूं वागधीश्वरी
क्रां क्रीं क्रूं कालिका देवि शां शीं शूं मे शुभं कुरु।।

कालरात्रि पूजा का महत्व:

देवी कालरात्रि की उत्पत्ति मां दुर्गा के क्रोध से हुई है. ये स्वरूप तामसिक शक्तियों का नाश करने वाला है. इसलिए देवी कालरात्रि की पूजा करने से महामारी और हर तरह की बीमारियों से बचा जा सकता है. देवी की पूजा से दुश्मनों पर जीत मिलती है. मां कालिका को भी देवी कालरात्रि का स्वरूप मानकर पूजा की जा सकती है.