Pic Credit: Google
Pic Credit: Google

    -सीमा कुमारी

    हिन्दू पंचांग के अनुसार, माघ पूर्णिमा के बाद फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली चतुर्थी तिथि को ‘द्विजप्रिय संकष्टी’ कहा जाता है। जो इस वर्ष अगले महीने 2 मार्च, मंगलवार को पड़ रही है। मंगलवार को पड़ने के कारण यह पावन दिन भक्तों के लिए अति शुभ बताया जा रहा है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन बुद्धि और विवेक के देवता विघ्नविनाशक भगवान श्री गणेश जी की  पूजा की जाती है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने से भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन के समस्त कष्ट दूर होते हैं। घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है। आईए जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व…

    शुभ मुहूर्त-

    • चतुर्थी तिथि आरंभ- 02 मार्च 2021 दिन मंगलवार प्रातः 05 बजकर 46 मिनट से।
    • चतुर्थी तिथि समाप्त-03 मार्च 2021 दिन बुधवार रात को 02 बजकर 59 मिनट पर।

    पूजा विधि-
    इस दिन प्रातः जल्दी स्नान कर, स्वच्छ वस्त्र पहनकर भगवान गणेश की पूजा उत्तर दिशा की ओर मुख कर दूर्वा, मोदक या लड्डू अर्पित कर धूप-दीप प्रज्वलित करें। विधिवत पूजन करें। पूजा संपन्न होने के बाद गणेश जी की आरती जरूर करें और एक ख़ास बात यह है कि गणेश जी की पूजा में तुलसी बिल्कुल अर्पित न करें।

    महत्व-
    हिन्दू पंचांग के अनुसार, हिन्दू धर्म में ‘द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी’ व्रत का विशेष महत्व है,जो हर साल कृष्ण पक्ष चतुर्थी को रखा जाता है। विध्नहर्ता गणेश जी को देवों में प्रथम माना गया है। इसलिए हर शुभ कार्य से पहले गणेश जी की पूजा की जाती  है। चूंकि, चतुर्थी तिथि भगवान गणेश जी के लिए रखी जाती है, धर्म पंडितों का मानना है कि, ‘द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी’ पर भगवान गणेश के 32 स्वरुपों में से छठे स्वरुप की पूजा करने का विधान है।

    ‘द्विजप्रिय गणपति’ के स्वरूप में भगवान गणेश के चार मस्तक और चार भुजाएं हैं। भगवान गणेश के इस स्वरूप की आराधना करने से व्यक्ति के जीवन के सभी कष्ट समाप्त होते हैं। भगवान गणेश की कृपा से अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।