जानिए कब है ‘शनिश्चरी अमावस्या’, साढ़ेसाती से बचने के लिए अपनाएं ये उपाय

    -सीमा कुमारी

    सनातन धर्म में ‘शनिश्चरी अमावस्या’ का विशेष महत्व होता है। शास्त्रों के अनुसार, फाल्गुन मास की अमावस्या 13 मार्च, शनिवार के दिन पड़ रही है। हिन्दू धर्म में अमावस्या तिथि एक विशेष महत्व रखती है और यदि यह शनिवार के दिन पड़े, तो इसका धार्मिक महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या को ‘शनिश्चरी  अमावस्या’ कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्म के आधार पर फल देते हैं। शनिदेव, जिनके गुरू स्वयं भगवान शिव हैं, जब प्रसन्न होते हैं तो ढेर सारी खुशियां देते हैं। लेकिन जब कोई कुछ गलत करता है, तो वह शनि की दृष्टि से नहीं बच सकता। ‘शनिश्चरी  अमावस्या’ का दिन शनि से संबंधित परेशानियों, जैसे शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति पाने के लिए बहुत ही अच्छा है। साथ ही इस दिन पितृ दोष आदि से भी छुटकारा पाया जा सकता है। तो चलिए जानें कब है इसका शुभ मुहूर्त और क्या है महत्व…

    शुभ मुहूर्त

    • अमावस्या तिथि आरंभ- 12 मार्च,शुक्रवार दोपहर 3 बजकर 5 मिनट से
    • अमावस्या तिथि समाप्त- 13 मार्च, शनिवार दोपहर 03 बजकर 51 मिनट पर

    महत्व
    आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार,  शनिश्चरी  अमावस्या के दिन जन्म-पत्रिका में अशुभ शनि के प्रभाव से होने वाली परेशानियों, जैसे शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और कालसर्प योग से भी छुटकारा मिलता है। शनि देव कर्मफल दाता हैं। वे न्याय के देवता हैं। शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्म के आधार पर फल देते हैं। ‘शनिश्चरी अमावस्या’ का दिन शनि से संबंधित परेशानियों जैसे शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति पाने के लिए बहुत ही अच्छा है। साथ ही इस दिन पितृ दोष आदि से भी छुटकारा पाया जा सकता है। लिहाजा ‘शनिश्चरी  अमावस्या’ के दिन कैसे आप शनि संबंधी परेशानियों से छुटकारा पा सकते हैं, और उनकी कृपा से कैसे अपने काम बना सकते हैं।

    शनि की साढ़ेसाती से बचने के लिए जातक कर सकते हैं ये उपाय

    • कहते हैं अगर आप शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या की चाल से परेशान हैं, तो आपको ‘शनि स्तोत्र’ का पाठ जरूर करना चाहिए। ऐसा भी कहा जाता है कि इस दिन शनि-यंत्र धारण करना शुभ होता है।
    • शास्त्रों के मुताबिक, ‘शनिश्चरी अमावस्या’ के दिन हनुमान जी को लाल सिंदूर चढ़ाने अथवा अर्पित करने से शनि की साढ़ेसाती के बुरे प्रभावों से मुक्ति मिल सकती है।
    • ऐसा माना जाता है कि ‘शनिश्चरी  अमावस्या’ के दिन स्नान आदि करने के बाद पीपल के वृक्ष की पूजा करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं और बुरे प्रभावों से मुक्ति  मिलती है।
    • मान्यताएं हैं कि, इस दिन शमी के पेड़ के पास दीपक जलाने से साढ़ेसाती या ढैय्या की पीड़ा से राहत मिलती है।
    • ऐसा कहा जाता है कि इस दिन काले कुत्ते या काली गाय को रोटी में सरसों का तेल लगाकर खिलाने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं।
    • ‘शनिश्चरी  अमावस्या’ के दिन शनिदेव को सरसों का तेल अर्पित करें। इससे भी शनि देव प्रसन्न होते हैं।