Learn Indira Ekadashi fasting story, remedy, and worship time

-सीमा कुमारी

इंदिरा एकादशी व्रत आश्विन माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है. इस साल इंदिरा एकादशी 13 सितंबर को है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितरों की मोक्ष प्राप्ति के लिए यह व्रत किया जाता है. इस व्रत का पितृपक्ष के समय में बहुत बड़ा महत्व है. इस व्रत के पुण्य प्रभाव से व्यक्ति जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है. यदि आप इस व्रत का पुण्य पितरों को दान कर देते हैं, तो उनको भी मोक्ष की प्राप्ति होती है. उनको बैकुण्ठ धाम में भगवान श्री हरि विष्णु के श्री चरणों में स्थान प्राप्त होता है. यमलोक में यमराज जिन पितर को दंड स्वरुप नरक लोक का कष्ट देते हैं, वे इंदिरा एकादशी व्रत के पुण्य से मोक्ष पाते हैं. इस व्रत का महत्व स्वयं श्री कृष्ण ने इंदिरा एकादशी व्रत कथा का महत्व धर्मराज युद्धिष्ठर को बताया था.

 इंदिरा एकादशी व्रत कथा: इंद्रसेन नाम का एक राजा था जिसका महिष्मति राज्य पर शासन था. राजा के राज्य में सभी प्रजा सुखी थी. और राजा इंद्रसेन भगवान विष्णु के परम भक्त थे. एक बार राजा के दरबार में देवर्षि नारद पहुंचे तब राजा ने उनका स्वागत सत्कार किया ,और आने का कारण पूछा.तब देवर्षि नारद ने बताया कि मैं यम से मिलने यमलोक गया था, वहां मैंने तुम्हारे पिता को देखा. वहां वह अपने पूर्व जन्म में एकादशी व्रत के खण्डित होने का दंड भोग रहे हैं. उन्हें तमाम तरह की यातनाएं झेलनी पड़ रही है. इसके लिए उन्होंने आपसे इंदिरा एकादशी का व्रत करने को कहा है. ताकि उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हो सके,तब राजा ने नारद जी से इंदिरा एकादशी व्रत के बारे में जानकारी देने को कहा. देवर्षि ने आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी व्रत की विधि के पालन के बारे में बताया, जिससे उनके पिता की आत्मा को शांति मिली और बैकुंठ की प्राप्ति हुई.

घर की सुख-शांति के लिए करें यह उपाय: इंदिरा एकादशी की शाम तुलसी के सामने गाय के घी का दीपक जलाये ,और ॐ वासुदेवाय नमः मंत्र बोलते हुए तुलसी की 11 परिक्रमा करें. इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है ,और घर में किसी भी तरह का संकट नहीं आता है.

इंदिरा एकादशी पूजा मुहूर्त:

  • एकादशी प्रारम्भ: 13 सितंबर की सुबह 04 बजकर 13 मिनट पर
  • एकादशी समाप्त: 14 सितंबर की सुबह 03 बजकर 16 मिनट तक
  • पारण का समय: 14 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 59 मिनट से शाम 03 बजकर 27 मिनट तक